कुमार अनेकान्त की कवितायें
Saturday, May 9, 2026
रंज
वे रंज करते रहे कि देर से क्यों आए,
हमने गनीमत मानी कि पहुँच तो गए।
- कुमार अनेकांत
१०/०५/२०२६
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