Sunday, May 24, 2026

मिथ्यात्व का नाश


मिथ्यात्व का नाश 


विष दे दो 
अगर न दे सको 
जीवन का विश्वास
और निश्चित ही नोंच लो 
मेरे पंख
यदि न दे सको 
उड़ने को आकाश 
चाहो तो निकाल लो 
मेरी दोनों आँखें 
यदि न दे सको 
सम्यक्त्व प्रकाश
ले लो मेरा सब कुछ तुम 
यदि कर सको 
मेरे मिथ्यात्व का नाश 

- कुमार अनेकांत 

www.anekantkavita.blogspot.com

Saturday, May 9, 2026

रंज



 वे रंज करते रहे कि देर से क्यों आए, 
हमने गनीमत मानी कि पहुँच तो गए। 

- कुमार अनेकांत 
 १०/०५/२०२६