Saturday, June 20, 2026

आखिर छीन ही लिया

आख़िर छीन ही लिया

रास्ता पूछने के बहाने ही
तुमसे दो बातें कर लेते थे,
मगर गूगल नाम की सौतन ने
वो बहाना भी छीन ही लिया।

माना कि इंटरनेट ने
हमें बहुत कुछ दिया है,
पर कलम-किताब के संग
तेरे दीदार का सिलसिला भी छीन ही लिया।

अब न राहों में ठहराव है,
न पूछने का कोई बहाना,
इस नई दुनिया की रफ़्तार ने
मिलने-जुलने का ज़माना ही छीन लिया।

कुमार अनेकांत
20/06/2026

Sunday, May 24, 2026

मिथ्यात्व का नाश


मिथ्यात्व का नाश 


विष दे दो 
अगर न दे सको 
जीवन का विश्वास
और निश्चित ही नोंच लो 
मेरे पंख
यदि न दे सको 
उड़ने को आकाश 
चाहो तो निकाल लो 
मेरी दोनों आँखें 
यदि न दे सको 
सम्यक्त्व प्रकाश
ले लो मेरा सब कुछ तुम 
यदि कर सको 
मेरे मिथ्यात्व का नाश 

- कुमार अनेकांत 

www.anekantkavita.blogspot.com

Saturday, May 9, 2026

रंज



 वे रंज करते रहे कि देर से क्यों आए, 
हमने गनीमत मानी कि पहुँच तो गए। 

- कुमार अनेकांत 
 १०/०५/२०२६ 

 

Wednesday, March 4, 2026

आत्महत्या




आत्महत्या 

ऊंची छत से कूद जाना 
पंखे से लटक जाना 
जहर खा लेना 
नस काट लेना 
ट्रेन से कट जाना 
ये वो आत्म हत्या है 
जो बस एक बार होती है 
और सब खत्म 
पर 
जानबूझ कर खुद को तन्हा कर लेना 
अपनों से ही बगावत कर लेना 
खुद का करियर खत्म कर लेना 
सदा आक्रोश में जीना 
खुद को भूलकर
किसी के प्यार में पागल हो जाना 
पूरी तरह इंद्रियों के वशीभूत हो जाना 
जरा सी बात पर अपमानित महसूस करना 
अपने आत्म संयम और आत्म बल को 
खो देना 
कुछ न सोचना न समझना 
न कुछ जानना और न जानने की इच्छा होना
विवेक शून्य हो जाना
वाणी पर संतुलन न रख पाना 
बात बात पर उत्तेजित होना 

ये भी तो आत्म हत्याएं हैं 
जिन्हें हम रोज करते हैं 
खुद को भूल कर 
तिल तिल रोज मरते हैं 

कुमार अनेकान्त 
 5/3/26

Sunday, February 1, 2026

आज पिता ने किए पूरे पचहत्तर वर्ष

कैसे भूलें कैसे कहें शब्द नहीं उत्कर्ष
आज पिता ने किए पूरे पचहत्तर वर्ष
सादगी समर्पण और गहरा संघर्ष 
खुद को भूले किया सभी का उत्कर्ष 
                     
सहे सभी उपद्रव शिकन न चेहरे पर आई 
परिवार निश्चिंत रहा कि हैं तो बड़े भाई 
किया बच्चों का पालन खुद का न ध्यान किया 
दिया सबको बहुत कुछ किसी से कुछ न लिया 

हो गए पूरे कर्तव्य अब करेंगे आत्मकल्याण 
परचिन्ता से दूर भजेंगे शाश्वत आतमराम 
जन्मदिन मंगलमय है सबकी यही कामना 
खुद को पा लें आप शीघ्र शुद्ध होवें भावना 

प्रो.अनेकान्त ,डॉ रुचि ,सुनय और अनुप्रेक्षा 

Tuesday, January 20, 2026

शुद्धात्मैकादशस्तोत्रम्

॥ शुद्धात्मैकादशस्तोत्रम् ॥
भूतभव्यवर्तमानानामर्हतां त्रिषु कालेषु ।
सर्वान् तान् जिनवरान् अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ १ ॥

भूतभव्यवर्तमानानां सिद्धानां परमेष्ठिनाम् ।
लोकाग्रस्थितसिद्धांश्च अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ २ ॥

भूतभव्यवर्तमानानामाचार्याणां महात्मनाम् ।
चारित्रधर्मसंयुक्तान् अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ३ ॥

भूतभव्यवर्तमानानामुपाध्यायान् महामुनीन् ।
श्रुतज्ञानप्रदीप्तांश्च अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ४ ॥

भूतभव्यवर्तमानानां साधूनां जिनशासनाम् ।
महाव्रतधरान् शुद्धान् अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ५ ॥

भूतभव्यवर्तमानानामणुव्रतधरान् जनान् ।
श्रावकान् जिनमार्गस्थां अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ६ ॥

भूतभव्यवर्तमानानां सम्यग्दृष्टीन् जिनाश्रयान् ।
तत्त्वश्रद्धासमायुक्तान् अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ७ ॥

भूतभव्यवर्तमानानां जिनमन्दिरभास्वताम् ।
देवायतनपुण्यानि अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ८ ॥

भूतभव्यवर्तमानानां जिनागमश्रुतात्मनाम् ।
धर्मज्ञानप्रदीपांश्च अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ९ ॥

कृत्रिमाकृत्रिमबिम्बानि जिनबिम्बानि भूतले ।
स्वर्गेऽपि यानि बिम्बानि तानि वन्दे निरन्तरम् ॥ १० ॥

त्रैकालिकस्वशुद्धात्मस्वरूपिणं निरामयम् ।
ज्ञानदर्शनसंयुक्तं अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ११ ॥

अनेकान्तकुमारजैन: 19/1/2026

Friday, January 2, 2026

हमारा हमसे ही अन्याय

हमारा हमसे ही अन्याय 

हम 
अक्सर 
अप्रमाणिक व्यक्ति की 
उस बात को 
जल्दी 
प्रमाण मान लेते हैं 
जो वह 
हमें 
हमारे ही मित्र के
खिलाफ भड़काने 
के लिए 
कहता है ।

कुमार अनेकांत 
३/१/२०२०