क्या करें ?
देखते देखते हो गए
आँखों से ओझल क्या करें ?
जो हर जगह दिखते थे
अब है लापता क्या करें ?
देखते देखते झर गए
शाखों के पत्ते क्या करें ?
जो हरे थे पीले हो गए
जमाने का दस्तूर क्या करें ?
जो बनकर घूमते थे राजा
वो रंक बन गए क्या करें ?
जो थे हर मर्ज़ का इलाज
वो पड़े हैं बीमार क्या करें ?
इठलाते थे ठुकरा कर जो हमें
तरसे हैं मिलन को क्या करें ?
हम जो पहले नहीं दिखे काम के
अब हर काम हमीं से क्या करें ?
कुमार अनेकांत
१४/०७/२६
TMU, सुनय ने ओझल शब्द देकर लिखने को कहा
क्या करें ? (२)
बारूद के ढेर पर ये जहां है क्या करें ?
रक्त रंजित अरमाँ हैं क्या करें ?
बुझाने वाले अब दिखते नहीं कहीं,
आग लगाने वाले हर तरफ हैं क्या करें ?
भोग ही अब योग है क्या करें ?
अंतहीन यह रोग है क्या करें ?
त्यागी ही है जब माया का दीवाना ,
पुण्य के चोले में हर पाप है क्या करें ?
जो मिला उसने ठगा है क्या करें ?
बचा नहीं कोई दगा है क्या करें ?
चापलूसी ही अब वो शास्त्र है
जो पढ़ा वो बढ़ा है क्या करें ?
धर्म अब व्यवसाय है क्या करें ?
महलों में कुटिया बनी है क्या करें ?
क्या बात करें हम राम राज की ?
राम खुद लुट चुके हैं क्या करें ?
कुमार अनेकांत
१६/०७/२०२६
नई दिल्ली