*जैन एकता जिंदाबाद*
हम मुट्ठी भर लोग हैं
पर परस्पर न कोई योग है
दूसरे पंथों को खत्म करने पर तुले हैं
अपने ही अंग काटने पर तुले हैं
अपनों पर ही चल रहे सारे हथियार
पराये हैं सुरक्षित करके भी वार
इसलिए कमजोर हैं
जैनेतर का दिखता जोर है
सीखो मधुमक्खियों से एकता
कोई उन्हें छेड़ भी नहीं सकता
नन्हीं सी जान हैं
पर एकता में महान् हैं
गिनती में अल्पसंख्यक
पर ताकत में बहुसंख्यक
अब सारे अहम् छोड़ दो
बस साधर्मी को जोड़ दो
निवेदन है बस एक ही यार
विधर्मी से समता रखो
और साधर्मी से प्यार