आत्महत्या
ऊंची छत से कूद जाना
पंखे से लटक जाना
जहर खा लेना
नस काट लेना
ट्रेन से कट जाना
ये वो आत्म हत्या है
जो बस एक बार होती है
और सब खत्म
पर
जानबूझ कर खुद को तन्हा कर लेना
अपनों से ही बगावत कर लेना
खुद का करियर खत्म कर लेना
सदा आक्रोश में जीना
खुद को भूलकर
किसी के प्यार में पागल हो जाना
पूरी तरह इंद्रियों के वशीभूत हो जाना
जरा सी बात पर अपमानित महसूस करना
अपने आत्म संयम और आत्म बल को
खो देना
कुछ न सोचना न समझना
न कुछ जानना और न जानने की इच्छा होना
विवेक शून्य हो जाना
वाणी पर संतुलन न रख पाना
बात बात पर उत्तेजित होना
ये भी तो आत्म हत्याएं हैं
जिन्हें हम रोज करते हैं
खुद को भूल कर
तिल तिल रोज मरते हैं
कुमार अनेकान्त
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