Sunday, February 1, 2026

आज पिता ने किए पूरे पचहत्तर वर्ष

कैसे भूलें कैसे कहें शब्द नहीं उत्कर्ष
आज पिता ने किए पूरे पचहत्तर वर्ष
सादगी समर्पण और गहरा संघर्ष 
खुद को भूले किया सभी का उत्कर्ष 
                     
सहे सभी उपद्रव शिकन न चेहरे पर आई 
परिवार निश्चिंत रहा कि हैं तो बड़े भाई 
किया बच्चों का पालन खुद का न ध्यान किया 
दिया सबको बहुत कुछ किसी से कुछ न लिया 

हो गए पूरे कर्तव्य अब करेंगे आत्मकल्याण 
परचिन्ता से दूर भजेंगे शाश्वत आतमराम 
जन्मदिन मंगलमय है सबकी यही कामना 
खुद को पा लें आप शीघ्र शुद्ध होवें भावना 

प्रो.अनेकान्त ,डॉ रुचि ,सुनय और अनुप्रेक्षा 

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