- डॉ अनेकान्त कुमार जैन
पहले समझता था श्रुत ही ज्ञान है
फिर पुस्तकों ने बताया यह तो जड़ भी कर सकता है
फिर लगा गणित ही ज्ञान है
फिर केलकुलेटर ने बताया यह तो जड़ भी कर सकता है
फिर लगा बहुत तरह की याददाश्त ज्ञान है
फिर रिकॉर्डर ने बताया यह तो जड़ भी कर सकता है
फिर लगा बहुत सारी सूचनाएं ज्ञान है
फिर इंटरनेट ने बताया यह तो जड़ भी कर सकता है
फिर लगा रिसर्च खोज ही ज्ञान है
फिर गूगल ने बताया यह तो जड़ भी कर सकता है
फिर लगा कि रचनात्मकता ज्ञान है
फिर AI ने बताया यह तो जड़ भी कर सकता है
तकनीक का विकास आत्मा के वास्तविक
ज्ञान गुण की समझ विकसित कर सकता है
समयसार आत्मा के ज्ञायक भाव से मिला सकता है
16/12/25
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