Sunday, February 1, 2026

आज पिता ने किए पूरे पचहत्तर वर्ष

कैसे भूलें कैसे कहें शब्द नहीं उत्कर्ष
आज पिता ने किए पूरे पचहत्तर वर्ष
सादगी समर्पण और गहरा संघर्ष 
खुद को भूले किया सभी का उत्कर्ष 
                     
सहे सभी उपद्रव शिकन न चेहरे पर आई 
परिवार निश्चिंत रहा कि हैं तो बड़े भाई 
किया बच्चों का पालन खुद का न ध्यान किया 
दिया सबको बहुत कुछ किसी से कुछ न लिया 

हो गए पूरे कर्तव्य अब करेंगे आत्मकल्याण 
परचिन्ता से दूर भजेंगे शाश्वत आतमराम 
जन्मदिन मंगलमय है सबकी यही कामना 
खुद को पा लें आप शीघ्र शुद्ध होवें भावना 

प्रो.अनेकान्त ,डॉ रुचि ,सुनय और अनुप्रेक्षा 

Tuesday, January 20, 2026

शुद्धात्मैकादशस्तोत्रम्

॥ शुद्धात्मैकादशस्तोत्रम् ॥
भूतभव्यवर्तमानानामर्हतां त्रिषु कालेषु ।
सर्वान् तान् जिनवरान् अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ १ ॥

भूतभव्यवर्तमानानां सिद्धानां परमेष्ठिनाम् ।
लोकाग्रस्थितसिद्धांश्च अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ २ ॥

भूतभव्यवर्तमानानामाचार्याणां महात्मनाम् ।
चारित्रधर्मसंयुक्तान् अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ३ ॥

भूतभव्यवर्तमानानामुपाध्यायान् महामुनीन् ।
श्रुतज्ञानप्रदीप्तांश्च अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ४ ॥

भूतभव्यवर्तमानानां साधूनां जिनशासनाम् ।
महाव्रतधरान् शुद्धान् अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ५ ॥

भूतभव्यवर्तमानानामणुव्रतधरान् जनान् ।
श्रावकान् जिनमार्गस्थां अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ६ ॥

भूतभव्यवर्तमानानां सम्यग्दृष्टीन् जिनाश्रयान् ।
तत्त्वश्रद्धासमायुक्तान् अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ७ ॥

भूतभव्यवर्तमानानां जिनमन्दिरभास्वताम् ।
देवायतनपुण्यानि अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ८ ॥

भूतभव्यवर्तमानानां जिनागमश्रुतात्मनाम् ।
धर्मज्ञानप्रदीपांश्च अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ९ ॥

कृत्रिमाकृत्रिमबिम्बानि जिनबिम्बानि भूतले ।
स्वर्गेऽपि यानि बिम्बानि तानि वन्दे निरन्तरम् ॥ १० ॥

त्रैकालिकस्वशुद्धात्मस्वरूपिणं निरामयम् ।
ज्ञानदर्शनसंयुक्तं अहं वन्दे निरन्तरम् ॥ ११ ॥

अनेकान्तकुमारजैन: 19/1/2026

Friday, January 2, 2026

हमारा हमसे ही अन्याय

हमारा हमसे ही अन्याय 

हम 
अक्सर 
अप्रमाणिक व्यक्ति की 
उस बात को 
जल्दी 
प्रमाण मान लेते हैं 
जो वह 
हमें 
हमारे ही मित्र के
खिलाफ भड़काने 
के लिए 
कहता है ।

कुमार अनेकांत 
३/१/२०२०

Thursday, January 1, 2026

नूतनवर्षाभिनंदनम् 2026

नूतनवर्षाभिनंदनम् 2026


नए वर्ष का मंगल प्रभात 
फिर आपका स्नेह साथ 
हो अपना यह मधुमय वर्ष 
बरसे ज्ञान न रहे संघर्ष 

मिथ्यात्व का हो पूर्ण विनाश 
जीवन हो सम्यक्त्व प्रकाश
‘अनुप्रेक्षा’ सी भावना रहे 
‘सुनय’ से हो एकांत नाश 

‘अनेकान्त’ से अभ्युदय हो 
अध्यात्म ‘रुचि’ विकसित हो 
प्राप्त करें जीवन का सार 
आपके हों सपने साकार 

नए वर्ष पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाओं के साथ 

प्रो अनेकान्त कुमार जैन 
डॉ रुचि जैन 
सुनय जैन ,अनुप्रेक्षा जैन
नई दिल्ली