मिथ्यात्व का नाश
विष दे दो
अगर न दे सको
जीवन का विश्वास
और निश्चित ही नोंच लो
मेरे पंख
यदि न दे सको
उड़ने को आकाश
चाहो तो निकाल लो
मेरी दोनों आँखें
यदि न दे सको
सम्यक्त्व प्रकाश
ले लो मेरा सब कुछ तुम
यदि कर सको
मेरे मिथ्यात्व का नाश
- कुमार अनेकांत
www.anekantkavita.blogspot.com
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