आख़िर छीन ही लिया
रास्ता पूछने के बहाने ही
तुमसे दो बातें कर लेते थे,
मगर गूगल नाम की सौतन ने
वो बहाना भी छीन ही लिया।
माना कि इंटरनेट ने
हमें बहुत कुछ दिया है,
पर कलम-किताब के संग
तेरे दीदार का सिलसिला भी छीन ही लिया।
अब न राहों में ठहराव है,
न पूछने का कोई बहाना,
इस नई दुनिया की रफ़्तार ने
मिलने-जुलने का ज़माना ही छीन लिया।
कुमार अनेकांत
20/06/2026
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