Sunday, February 17, 2013
Wednesday, January 9, 2013
संत या फिर अंत
संत या फिर अंत
कुमार अनेकान्त
जब भारत से ही उठ
जायेगा संतों का सम्मान
तब फिर कौन कहेगा
इसको राष्ट्र महान
माया के भी राज में
हुआ था संतों का अपमान
राज पाट सब गया अटके
सी.बी.आई में प्राण
नरेन्द्र मोदी जीते
बहुमत से हुए हैं शहंशाह
जिनके वर से जीते कर लो उनकी भी परवाह
नए साल में हुआ है
गुजरात में संतों पर हमला
ऐसा अशुभ संकेत ना
कर दे सरकार को कंगला
लोकपाल की नियुक्ति
से ही शुरुआत हो गई है
पी एम् के सपने में
भी सेंध लग गई है
देखो कुंडली का राज
योग भी बदल जाता है
कब दिन फिर जायें,पुण्य नष्ट हो जाता है
संतों के खून से कभी
सिंहासन ना बनते हैं
जो आकाश में उड़े वो
धरती पर भी गिरते हैं
अभी वक्त है मांगो
माफ़ी,बचाओ अपनी शान
कड़ी कार्यवाही से
कर दो दोषियों को नाकाम
कह दो गुजरात में
हर संत उन्मुक्त विचरेगा
काट देगा मोदी वो
हाथ जो संतों पर उठेगा
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