Wednesday, July 15, 2026

क्या करें ?

क्या करें ? 

देखते देखते हो गए 
आँखों से ओझल क्या करें ?
जो हर जगह दिखते थे
अब है लापता क्या करें ?

देखते देखते झर गए 
शाखों के पत्ते क्या करें ?
जो हरे थे पीले हो गए
जमाने का दस्तूर क्या करें ? 

जो बनकर घूमते थे राजा
वो रंक बन गए क्या करें ?
जो थे हर मर्ज़ का इलाज
वो पड़े हैं बीमार क्या करें ?

इठलाते थे ठुकरा कर जो हमें 
तरसे हैं मिलन को क्या करें ?
हम जो पहले नहीं दिखे काम के
अब हर काम हमीं से क्या करें ?

कुमार अनेकांत 
१४/०७/२६
TMU, सुनय ने ओझल शब्द देकर लिखने को कहा 

क्या करें ? (२)

बारूद के ढेर पर ये जहां है क्या करें ? 
रक्त रंजित अरमाँ हैं क्या करें ?
बुझाने वाले अब दिखते नहीं कहीं,
आग लगाने वाले हर तरफ हैं क्या करें ?

भोग ही अब योग है क्या करें ?
अंतहीन यह रोग है क्या करें ? 
त्यागी ही है जब माया का दीवाना ,
पुण्य के चोले में हर पाप है क्या करें ?

जो मिला उसने ठगा है क्या करें ? 
बचा नहीं कोई दगा है क्या करें  ?
चापलूसी ही अब वो शास्त्र है 
जो पढ़ा वो बढ़ा है क्या करें ?

धर्म अब व्यवसाय है क्या करें ?
महलों में कुटिया बनी है क्या करें ?
क्या बात करें हम राम राज की ?
राम खुद लुट चुके हैं क्या करें ?

कुमार अनेकांत
१६/०७/२०२६
नई दिल्ली 

क्या करें ?  (३)

(गुरु पूर्णिमा विशेष)


सीखना न अब कोई चाहे क्या करें ?
सिखाने पर सब उतारू क्या करें ?
शिष्य कोई होना नहीं अब चाहता ,
जिसे देखो वो ही गुरु है क्या करें ?

कभी न खोलें ग्रंथ बोलो क्या करें ? 
ऐसे ज्ञानी गुरु हैं बोलो क्या करें ? 
दे रहे वो उपदेश जिन्होंने खुद सुने नहीं,
हर गली में प्रवचनकार बोलो क्या करें ?

गुरुकुल में जो रहते थे वे राम बने 
महलों में  गुरु तो दुर्योधन क्या करें ?
क्या होम ट्यूशन प्रवर्तक द्रोणाचार्य थे ,
विद्यालय हैं सूने बोलों क्या करें ? 

विश्वविद्यालय हर गांव में बोलो क्या करें ? 
और विद्यार्थी लपके विदेश क्या करें ?
अंग्रेजों ने एक कंपनी खोली थी ,
अब खोले अनेक कैंपस बोलो क्या करें ? 

एकलव्य हैं गायब बोलो क्या करें ? 
वैसा नहीं समर्पण बोलो क्या करें ? 
अंगूठा अब क्यों काटें तुम्हारे लिए ?
दिखाते हैं अंगूठा बोलो क्या करें ? 

बायोमैट्रिक अब युग  है क्या करें ?
हस्ताक्षर सब नकली हैं क्या करें ? 
पहले अंगूठा अनपढ़ों की पहचान था ,
अब सभी अंगूठा छाप हैं क्या करें ? 


कुमार अनेकांत
१८/०७/२०२६

क्या करें ? (४)


हो रही हैं बारिशें क्या करें ?
फिर भी रहते हैं प्यासे क्या करें ? 
न जाने हो रही हैं कैसी साजिशें 
भीगता कुछ भी नहीं है क्या करें ?

Gen Z को नहीं जानते क्या करें? 
कॉकरोच कह रहे माननीय क्या करें ? 
खुद ही हवा दे रहे हैं आग को, 
विपक्ष रोटी सेंके तो क्या करें ?

बालक बानर नहीं समझते क्या करें ?
राम लुटे, हैं नाराज भक्त क्या करें ? 
लंका दहन कर देंगे ये वो हनुमान हैं ,
तुम ही लगाते आग पूँछ में क्या करें ? 

अपने ही मन की कहते हैं क्या करें ? 
इनके  मन की नहीं सुनते हैं क्या करें ? 
नहीं मिले इलाज जब किसी अस्पताल में ,
जंतर मंतर ही शरण है क्या करें?

आचार्य अनेकांत (२३/०७/२६)

आत्म ज्ञान से शून्य हैं क्या करें ? 
मान बढ़ाई से त्रस्त हैं क्या करें ? 
छोड़ा था घर खुद को पाने के लिए ,
अब जग प्रपंच में मस्त हैं क्या करें ?
(२४/०७/२६)

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