Saturday, August 29, 2026

सम्यग्दर्शन

सम्यग्दर्शन

खुद
ही
ठीक
हो
जाएंगीं
सारी
बातें
यदि
बंद
होने
से
पहले
खुल
जाएं
आँखें ।

अनेकांत
३०/८/२६

Thursday, August 27, 2026

तुम रूठे - प्राकृत गाथा

तुम रूठे 

*तुम्हं रुट्ठे अम्हे, दुक्खसएहिं विमुक्का हि अम्हे।*
*तुज्झ कोहो सुहकरो, अम्हाणं सो वरं लद्धं।।*

भावार्थ:

तुम रूठे तो हम सैकड़ों दुःखों से मुक्त हो गए;
तुम्हारा क्रोध भी हमारे लिए सुखकर निकला,हमें तो वही वरदान मिल गया।

अनेकांत
२८/०८/२६

दिल टूटने से थोड़ी तकलीफ तो हुई ,लेकिन तमाम उम्र का आराम हो गया ।

Tuesday, August 25, 2026

कोई पूछता नहीं - प्राकृत गाथा

कोई पूछता नहीं 


थेरा सव्वं जाणंति, सव्वकज्जेसु उवाया बहुविहा हि।
तेसिं को वि ण पुच्छइ हि, एसा लोअस्स विडंबणा।।
 
बुज़ुर्गों को सब पता है,उनके पास हर समस्या का  समाधान भी है, पर इस जगत में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उनसे समाधान पूछने वाला कोई नहीं है ।

अनेकांत
२५/०८/२६

Sunday, August 23, 2026

दूरी - प्राकृत गाथा

दूरी 

दूरट्ठिओ ण दूरो, जो जस्स मणम्मि णिच्चं संठिओ।
जो जस्स हिअए णत्थि, समीवट्ठिओ वि अइ दूरओ।।

जो जिसके मन में सदा बसा है, वह दूर रहकर भी पास है।
और जो जिसके हृदय में नहीं बसा, वह समीप रहकर भी अत्यन्त दूर है।


अनेकांत 
२३/०८/२६

Friday, August 21, 2026

दोष - प्राकृत गाथा

दोसे णिवारइ जणो,
सो हि हितकामी तस्स मा कुप्पह।
विणासिणो ण बोहंति,
विणासं च कुणंति हि सव्वदा॥

भावार्थ:
जो तुम्हारे दोषों को बताया करता है ,तुम्हें रोकता टोकता है, वही वास्तव में तुम्हारा हितैषी है,उससे कभी नाराज मत होना । जो तुम्हारा विनाश चाहते हैं, वे तुम्हें सावधान नहीं करेंगे, कभी तुम्हें रोकेंगे टोकेंगे नहीं ,बल्कि विनाश ही करेंगे । 

प्रो अनेकांत कुमार जैन 
२२/०८/२६