Thursday, August 27, 2026

तुम रूठे - प्राकृत गाथा

तुम रूठे 

*तुम्हं रुट्ठे अम्हे, दुक्खसएहिं विमुक्का हि अम्हे।*
*तुज्झ कोहो सुहकरो, अम्हाणं सो वरं लद्धं।।*

भावार्थ:

तुम रूठे तो हम सैकड़ों दुःखों से मुक्त हो गए;
तुम्हारा क्रोध भी हमारे लिए सुखकर निकला,हमें तो वही वरदान मिल गया।

अनेकांत
२८/०८/२६

दिल टूटने से थोड़ी तकलीफ तो हुई ,लेकिन तमाम उम्र का आराम हो गया ।

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