दोसे णिवारइ जणो,
सो हि हितकामी तस्स मा कुप्पह।
विणासिणो ण बोहंति,
विणासं च कुणंति हि सव्वदा॥
भावार्थ:
जो तुम्हारे दोषों को बताया करता है ,तुम्हें रोकता टोकता है, वही वास्तव में तुम्हारा हितैषी है,उससे कभी नाराज मत होना । जो तुम्हारा विनाश चाहते हैं, वे तुम्हें सावधान नहीं करेंगे, कभी तुम्हें रोकेंगे टोकेंगे नहीं ,बल्कि विनाश ही करेंगे ।
प्रो अनेकांत कुमार जैन
२२/०८/२६
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