कोई पूछता नहीं
थेरा सव्वं जाणंति, सव्वकज्जेसु उवाया बहुविहा हि।
तेसिं को वि ण पुच्छइ हि, एसा लोअस्स विडंबणा।।
बुज़ुर्गों को सब पता है,उनके पास हर समस्या का समाधान भी है, पर इस जगत में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उनसे समाधान पूछने वाला कोई नहीं है ।
अनेकांत
२५/०८/२६
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