अभी जीने का शऊर आया ही नहीं,
उन्होंने मरने की इजाज़त दे डाली ।
Tuesday, March 13, 2018
Thursday, February 15, 2018
वो मुझसे प्यार नहीं करती ? कुमार अनेकान्त
वो मुझसे प्यार नहीं करती ?
रोज सुबह पांच बजे उठती है
बच्चों का टिफिन बनाती है
और मेरे लिए चाय
अखबार छुपा देती है
ताकि मैं जल्दी नहाकर
मंदिर हो आऊं
जबरजस्ती मॉर्निंग वॉक पर
ले जाती है
मेरा मनपसंद खाना भी नहीं देती है
वो खाना देती है जिससे
वजन न बढ़े और मैं स्वस्थ्य रहूं
मुझे क्या पहनना है
किस रंग का पहनना है
अधिकार पूर्वक तय करती है
विश्वविद्यालय जाते समय
पर्स, मोबाइल,पेन,रुमाल
बैग हाथ में दे देती है
वहाँ पहुंचते ही फ़ोन करती है
अच्छे से पहुंच गए न
लंच के बाद पूछती है
दवा ले ली न
इस बीच कपड़े धो देती है
बाजार से सामान ले आती है
बच्चों को स्कूल से लाती है
शाम को फोन करती है
कब तक पहुंचोगे
शाम के खाने को देर मत करना
घर आते ही पूछती है दिन कैसा रहा ?
मेरी उलझने सुनती है
सुलझाने की कोशिश करती है
कुछ नया लिखने को प्रेरित करती है
कोई महंगी चीज ख़रीदकर दो
तो डांटती है क्या जरूरत थी इतने खर्चे की
दिन भर नाचती है सबकी सेवा में
फोन करती है मगर मां बापू को उनकी खैर पूछने
मुझे एक बार भी आई लव यू नहीं बोलती
मगर कौन कहता है
वो मुझसे प्यार नहीं करती ?
जो खुद गुलाब है
उसे क्या गुलाब दूं ?
जिसका हर दिन वेलेंटाइन है
उसपर जान कुर्बान दूं ।
-कुमार अनेकान्त
रोज सुबह पांच बजे उठती है
बच्चों का टिफिन बनाती है
और मेरे लिए चाय
अखबार छुपा देती है
ताकि मैं जल्दी नहाकर
मंदिर हो आऊं
जबरजस्ती मॉर्निंग वॉक पर
ले जाती है
मेरा मनपसंद खाना भी नहीं देती है
वो खाना देती है जिससे
वजन न बढ़े और मैं स्वस्थ्य रहूं
मुझे क्या पहनना है
किस रंग का पहनना है
अधिकार पूर्वक तय करती है
विश्वविद्यालय जाते समय
पर्स, मोबाइल,पेन,रुमाल
बैग हाथ में दे देती है
वहाँ पहुंचते ही फ़ोन करती है
अच्छे से पहुंच गए न
लंच के बाद पूछती है
दवा ले ली न
इस बीच कपड़े धो देती है
बाजार से सामान ले आती है
बच्चों को स्कूल से लाती है
शाम को फोन करती है
कब तक पहुंचोगे
शाम के खाने को देर मत करना
घर आते ही पूछती है दिन कैसा रहा ?
मेरी उलझने सुनती है
सुलझाने की कोशिश करती है
कुछ नया लिखने को प्रेरित करती है
कोई महंगी चीज ख़रीदकर दो
तो डांटती है क्या जरूरत थी इतने खर्चे की
दिन भर नाचती है सबकी सेवा में
फोन करती है मगर मां बापू को उनकी खैर पूछने
मुझे एक बार भी आई लव यू नहीं बोलती
मगर कौन कहता है
वो मुझसे प्यार नहीं करती ?
जो खुद गुलाब है
उसे क्या गुलाब दूं ?
जिसका हर दिन वेलेंटाइन है
उसपर जान कुर्बान दूं ।
-कुमार अनेकान्त
Saturday, February 18, 2017
एक वोट माँगा था,दिल के चुनाव में
एक वोट माँगा था,दिल के चुनाव में
जमानत जब्त करवा दी ,उसने ख्वाब में
निर्दलीय था तो क्या हुआ,दिल तो था
नामांकन भी नहीं किया मेरे प्रस्ताव में
जमानत जब्त करवा दी ,उसने ख्वाब में
निर्दलीय था तो क्या हुआ,दिल तो था
नामांकन भी नहीं किया मेरे प्रस्ताव में
©Kumar Anekant
Sunday, December 25, 2016
तुम अपना बस मतलब साधो काम बना लो
बिखरे सपनों का ढेर पड़ा है मजे उड़ा लो
और कुछ रातें जगी खड़ी हैं उन्हें सुला लो
टूटे अरमानों पर उनके महल खड़े हैं
तुम खुशियों की उनमें बरात सजा लो
मेरी मजबूरी पर लब उनके मुस्काते हैं
इस दिल से जब भी चाहो मन बहला लो
जीते हरदम लेकिन तेरे घर हारे हैं
तुम जीतों के रंगबिरंगे जश्न मना लो
कोई नहीं साथ तुम्हारे 'अनेकांत' यहाँ पर
उनकी महफ़िल भंग न हो इंतजाम करा लो
रोये चाहे कोई कहीं पर उससे तुमको क्या
तुम अपना बस मतलब साधो काम बना लो
- (c) कुमार अनेकांत
और कुछ रातें जगी खड़ी हैं उन्हें सुला लो
टूटे अरमानों पर उनके महल खड़े हैं
तुम खुशियों की उनमें बरात सजा लो
मेरी मजबूरी पर लब उनके मुस्काते हैं
इस दिल से जब भी चाहो मन बहला लो
जीते हरदम लेकिन तेरे घर हारे हैं
तुम जीतों के रंगबिरंगे जश्न मना लो
कोई नहीं साथ तुम्हारे 'अनेकांत' यहाँ पर
उनकी महफ़िल भंग न हो इंतजाम करा लो
रोये चाहे कोई कहीं पर उससे तुमको क्या
तुम अपना बस मतलब साधो काम बना लो
- (c) कुमार अनेकांत
सभी को माफ़ कर दें
आज दिल के रंजोगम चलो मिलकर साफ़ कर दें
जियेंगे कब तक घुटन में अब सभी को माफ़ कर दें
मांग लें माफ़ी गुनाहों की जो अबतक हमने किये
अब नहीं कोई शिकायत दुनिया को ये साफ़ कर दें
-डॉ० अनेकांत
Wednesday, February 3, 2016
साजिशें - कुमार अनेकांत
मुस्कुरा के मिलते हैं पालते हैं रंजिशें ,
दौरे जहां में कैसी स्वार्थ की हैं बंदिशें ?
रोज सौगातों की भी कैसी हो रही हैं साजिशें।
भीगता कुछ है नहीं और हो रही हैं बारिशें।।
दौरे जहां में कैसी स्वार्थ की हैं बंदिशें ?
रोज सौगातों की भी कैसी हो रही हैं साजिशें।
भीगता कुछ है नहीं और हो रही हैं बारिशें।।
Sunday, December 13, 2015
जब नहीं था प्रिये,----------
जब इन्टरनेट नहीं था प्रिये
-कुमार अनेकान्त
जब इन्टरनेट नहीं था प्रिये
लोग कैसे जीवन जीते थे ?
बिना फोन फेसबुक के
अपनी अभिव्यक्ति करते थे?
बच्चे कैसे करते थे होमवर्क ?
कैसे प्रोजेक्ट, असाइन्मेंट होता था ?
बिना पावर प्वाइन्ट के प्रिये
कैसे टीचर लेक्चर देता था ?
बिन शादी.com के प्रिये ?
रिश्ता कैसे होता था ?
बिना फ्रेन्ड रिक्वेस्ट को भेजे
क्यों कोई अन्जान से मिलता था ?
आज भी ऐसे हैं लोग प्रिये
जो बिन बोले भी बतिया लेते हैं।
मुस्कुराते लबों के पीछे भी
छुपे दर्द को भांप लेते हैं ।।
जिन्दगी वर्चुअल खत्म Actual
हम तो उस युग में जीते हैं ।
लाइट नहीं तो लाइफ नहीं,
इस भ्रम ट्री को सीचते हैं।।
-कुमार अनेकान्त
जब इन्टरनेट नहीं था प्रिये
लोग कैसे जीवन जीते थे ?
बिना फोन फेसबुक के
अपनी अभिव्यक्ति करते थे?
बच्चे कैसे करते थे होमवर्क ?
कैसे प्रोजेक्ट, असाइन्मेंट होता था ?
बिना पावर प्वाइन्ट के प्रिये
कैसे टीचर लेक्चर देता था ?
बिन शादी.com के प्रिये ?
रिश्ता कैसे होता था ?
बिना फ्रेन्ड रिक्वेस्ट को भेजे
क्यों कोई अन्जान से मिलता था ?
आज भी ऐसे हैं लोग प्रिये
जो बिन बोले भी बतिया लेते हैं।
मुस्कुराते लबों के पीछे भी
छुपे दर्द को भांप लेते हैं ।।
जिन्दगी वर्चुअल खत्म Actual
हम तो उस युग में जीते हैं ।
लाइट नहीं तो लाइफ नहीं,
इस भ्रम ट्री को सीचते हैं।।
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