Saturday, January 27, 2024

तित्थसंरक्खणं / तीर्थ संरक्षण

वड्ढदु णूयणतित्थं
सया मम कामणा पुरातित्थं वि ।
बालगस्स लालणे वि
मूलरक्खणं मा विस्सरिदव्वं ।।
मेरी कामना है कि सदा नए तीर्थों का निर्माण हो किन्तु प्राचीन तीर्थ भी संरक्षित हों ,उनका विकास हो । नवजात बालक के लालन पालन में मूल माता पिता और दादा दादी का रक्षण नहीं भूलना चाहिए ।

©कुमार अनेकांत 
28/1/24

Sunday, January 21, 2024

मैं राम होना चाहता हूँ

मैं श्रीराम होना चाहता हूँ 
- कुमार अनेकांत जैन 

मैं राम होना चाहता हूँ ,श्री राम होना चाहता हूँ ,
तोड़कर अब सारे बंधन भगवान् होना चाहता हूँ ।

ऋषभ के आदर्श को स्वीकार करना चाहता हूँ 
भरत सा निर्लिप्त जीवन आज जीना चाहता हूँ ।

मैं राम होना ....

अजित होकर आत्मा में  विश्राम लेना चाहता हूँ, 
सुमतिवत् शुद्धात्मा का राम होना चाहता हूँ ।  

मैं राम होना....
                             तोड़कर अब सारे बंधन अनंत होना चाहता हूँ,
भोग के इस सरोवर में पद्म होना चाहता हूँ ।

मैं राम होना....

ऋषि मुनि की इस धरा पर मुक्त जीना चाहता हूँ,दया अहिंसा से जगत को अवध करना चाहता हूँ ।

मैं राम होना....

नगरी विनीता की धरा से निरहंकार होना चाहता हूँ,                          शिथिल हों अब सारे बंधन अभिनंदन होना चाहता हूँ ।

मैं राम होना.....

सुव्रत मुनि के आचरण का अंजाम होना चाहता हूँ,संसार सागर पार अभिराम होना चाहता हूँ ।

मैं राम होना....

अनंत जन्म के कर्मधनुष का शीध्र भंजन चाहता हूँ ।
मुक्ति सीता का वरणकर निष्काम होना चाहता हूँ ।

मैं राम होना...

देख नश्वर जगत को जो 
स्वयं वैरागी हुए,
उस विरागी दशरथ की संतान होना चाहता हूँ। 

मैं श्री राम होना चाहता हूं ,तोड़कर अब सारे बंधन निष्काम होना चाहता हूँ ।

सम्यक्त्व अयोध्या की धरा पर ज्ञानमंदिर चाहता हूँ,
और उसके भाल पर शिखर होना चाहता हूँ। 

राम होना...
तोड़कर मैं सारे बंधन श्री राम होना चाहता हूं ।

प्राप्तकर शुद्धात्मा खुद में बरसना चाहता हूँ, 
मांगीतुंगी के शिखर से सिद्ध होना चाहता हूँ।। 
               
राम होना --2
तोड़कर अब सारे बंधन भगवान् होना चाहता हूँ,मैं श्री राम होना चाहता हूँ- 2

21/01/24

Monday, January 8, 2024

अयोध्या (प्राकृत गाथा )

धण्णो णव अयोज्झा 
उसह-भरह-बाहुबली-अजिय-सुमइ ।
पवित्तो खलु जम्मभूमि 
अहिणंदण-अणंत-रामो य ।।

यह नई अयोध्या धन्य है जो प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव,उनके पुत्र भरत (जिनके नाम पर देश का नाम भारत हुआ )तथा बाहुबली ,द्वितीय तीर्थंकर अजितनाथ,चतुर्थ तीर्थंकर अभिनन्दननाथ,पंचम तीर्थंकर सुमतिनाथ ,चौदहवें तीर्थंकर अनंतनाथ तथा भगवान् श्री राम की पवित्र जन्मभूमि है ।

कुमार अनेकांत 
9/1/24

Monday, December 18, 2023

भारत नामकरण

उसहसुपुत्तो भरदो 
चक्कवत्तीसासगो छक्खंडे
देसोभारदवस्सो
णामो वि जादो भरदत्तो 

तीर्थंकर ऋषभदेव के पुत्र भरत जो छह खंड के चक्रवर्ती सुशासक राजा थे , अपने देश का नाम भारतवर्ष उन्हीं भरत सम्राट के कारण पड़ा । 

इइ सुकहापुराणेसु ,
गायन्ति खलु वेदजइणागमेसु ।
खरवेलसिलालेहे ,
'भरधवस' खलु दसमपंतिम्मि ।। 

यह सुकथा वैदिक एवं जैन पुराणों एवं आगमों में खुलकर गाई गयी है तथा खारवेल के शिलालेख में भी भारत वर्ष यही नाम मिलता है । 

19/12/23
प्रो अनेकांत जैन 

Saturday, December 16, 2023

धर्म और तीर्थ की रक्षा के लिए प्राकृत भाषा में आह्वान

धर्म और तीर्थ की रक्षा के लिए प्राकृत भाषा में आह्वान
(चित्र - जब एक पत्थर का मनुष्य भी मूल स्तंभ को बचाने की कोशिश कर सकता है तो हम तो अभी जिंदा हैं )

धर्म बचेगा तो राष्ट्र बचेगा ,राष्ट्र बचेगा तो हम बचेंगे

किं य हवइ विरोहेण,सुधरणा पदंसणण्दोलणेण।
जीवोहं ण मरिदं सणातणजुज्झिस्सामि ।।

लोग पूछते हैं अहिंसक विरोध,धरना,प्रदर्शन और आंदोलनों से क्या होता है ? 
(आज के हिंसक युग में उससे कुछ ज्यादा होता हो या न होता हो किन्तु ) उससे यह पता चलता है कि मैं जीवित हूँ और अभी तक मरा नहीं हूँ और सनातन जैन धर्म और तीर्थ की रक्षा के लिए मृत्यु तक संघर्ष करता रहूंगा ।


प्रो अनेकांत कुमार जैन 
संपादक - पागद भासा (प्राकृत भाषा का प्रथम अखबार)
प्राकृत विद्याभवन ,नई दिल्ली

Friday, September 29, 2023

क्षमावाणी

क्षमावाणी 
के संदेश 
पोस्टकार्डों 
लिफाफों 
विज्ञापनों 
से निकलकर 
ट्विटर
फेसबुक
व्हाट्सअप
और इंस्टा पर आ गया है 
हम जगत के सभी जीवों को क्षमा कर रहे हैं और सभी जीवों से क्षमा 
मांग रहे हैं 
पर वे गिनती के कुछ जीव आज भी आपकी वाणी सुनने को तरस रहे हैं 
जिनके अपराधों को या जिनके प्रति अपराधों को 
हम आज भी विस्मरण कर रहे हैं ।

क्षमा आत्मा का 
और वाणी शरीर का धर्म है अपनी आत्मा की क्षमा को वाणी तक लाइये 
सिर्फ संदेश से न निपटाईये
'दूरवाणी' भी चलेगी 
पर दिल तो बनाइये 

- कुमार अनेकांत