Sunday, February 16, 2020

वो मुझसे प्यार नहीं करती ?

वो मुझसे प्यार नहीं करती ?

रोज सुबह पांच बजे उठती है
बच्चों का टिफिन बनाती है
और मेरे लिए चाय 
अखबार छुपा देती है 
ताकि मैं जल्दी नहाकर
मंदिर हो आऊं 
जबरजस्ती मॉर्निंग वॉक पर 
ले जाती है
मेरा मनपसंद खाना भी नहीं देती है 
वैसा खाना देती है जिससे 
वजन न बढ़े और मैं स्वस्थ्य रहूं 
मुझे क्या पहनना है 
किस रंग का पहनना है
अधिकार पूर्वक तय करती है 
विश्वविद्यालय जाते समय 
पर्स, मोबाइल,पेन,रुमाल
बैग हाथ में दे देती है 
वहाँ पहुंचते ही फ़ोन करती है 
अच्छे से पहुंच गए न 
लंच के बाद पूछती है 
दवा ले ली न
इस बीच कपड़े धो देती है 
बाजार से सामान ले आती है 
बच्चों को स्कूल से लाती है 
शाम को फोन करती है 
कब तक पहुंचोगे 
शाम के खाने को देर मत करना
घर आते ही पूछती है दिन कैसा रहा ?
मेरी उलझने सुनती है 
सुलझाने की कोशिश करती है
कुछ नया लिखने को प्रेरित करती है 
कोई महंगी चीज ख़रीदकर दो 
तो डांटती है क्या जरूरत थी इतने खर्चे की
उसे डांस नहीं आता पर  
दिन भर नाचती है....सबकी सेवा में.... 
फोन करती है.....मगर मां बापू को, उनकी खैर पूछने,
सिर्फ अपना ध्यान नहीं रखती 
पूछो तो हँसकर कहती है 
आप ठीक तो मैं ठीक 
खुद के लिए नहीं जीती 
लेकिन मुझे कभी 
एक बार भी आई लव यू नहीं बोलती 
मगर कोई कह सकता है ?
वो मुझसे प्यार नहीं करती ?

जो खुद गुलाब है 
उसे क्या गुलाब दूं ?
जिसका हर दिन वेलेंटाइन है 
उसपर जान कुर्बान दूं ।

- कुमार अनेकान्त १४/०२/२०१८

Tuesday, January 14, 2020

मेरी संक्रांति दूर करो

मेरी भावनाओं की एक 
पतंग 
तुम्हारे दिल की 
छत पर 
कब से अटकी पड़ी है 
उसकी छुड़ैय्या
दे दो
मेरी भी संक्रांति 
मना दो 

- कुमार अनेकांत 
१४/०१/२०२०
मकर संक्रांति

Thursday, January 2, 2020

हमारा हमसे ही अन्याय

हमारा हमसे ही अन्याय 

हम 
अक्सर 
अप्रमाणिक व्यक्ति की 
उस बात को 
जल्दी 
प्रमाण मान लेते हैं 
जो वह 
हमें 
हमारे ही मित्र के
खिलाफ भड़काने 
के लिए 
कहता है ।

 ©कुमार अनेकांत
३/१/२०२०

Tuesday, October 22, 2019

यहां हर शख्स पत्रकार है

फेसबुक वॉट्सएप 
यूट्यूब का दरबार है 
न सलीका‌ न शऊर
हर शख्स पत्रकार है 

सेठ जी हैं संपादक संपादकीय पढ़ पाते नहीं  
क्या छपा है उनके नाम से 
विचार कर पाते नहीं 

प्रवचन जिनके छपते 
वे संत कभी लिखते नहीं 
आत्मकथा उनकी भी छपी
जो पत्र लिख सकते नहीं 

कौन कर रहा यह सेवा 
क्या पता कर सकते नहीं 
नमन उन अनजाने लेखकों को
जो नाम पा सके ही नहीं

कुमार अनेकांत

Monday, September 9, 2019

चिंता मत करो ISRO

चिंता मत करो ISRO

संपर्क
..............

मेरे दिल का
चंद्रयान
भी मेरे चांद
पर गिर गया था
और मेरा मुझसे ही
संपर्क टूट गया था
वो मजबूत था
इसलिए टूट कर बिखरा नहीं
और इसीलिए
मुझे तो आज वर्षों बाद
भी संपर्क की
पूरी उम्मीद है
तुम मुझ तक
कभी नहीं पहुंचे
पर
मैं तुम तक जरूर
पहुंचूंगा

-  कुमार अनेकांत

Friday, August 16, 2019

Bill

एक बिल मेरा भी
तुम्हारे दिल की राज्यसभा में
वर्षों से लटका पड़ा है
उसे पास करा दो

Tuesday, July 23, 2019

अपनाष्टक

*अपनाष्टक*

दुख की काली बदली छायी,
न खुशियों की कोई बात है ।
अवसाद भरी इस महफिल में ,
अब हर कोई नाराज़ है ।।१।।

मन अच्छा हो तो हम ढूढें,
रोज बहाने मिलने के ।
मन कच्चा हो तो हम ढूढें,
रोज बहानें लड़ने के ।।२।।

छोटी छोटी बातों में ,
तिल का ताड़ बनाते हम ।
व्यर्थ सभी अध्यात्म है दिखता,
यदि साथ नहीं रह पाते हम ।।३।।

अपनों को विस्मृत करके हम ,
औरों को गले लगाते हैं ।
उनसे मिलते मुस्काते हैं ,
बस अपनों में छल दिखलाते हैं ।।४।।

अपना ही है प्रतिद्वंद्वी ,
गैर सहयोगी दिखते हैं ।
अपने ठगे जाते हैं अब तो ,
गैर ही मजे उड़ाते हैं ।।५।।
भाग्य बंधा है जिनसे अपना ,
कैसे भी उनसे बोलो तुम ।
संवादों को जारी रखो,
उसकी भूलों को भूलो तुम ।।६।।

कल तक जो था जान छिड़कता ,
अचानक क्यों बेरुखा
दिखता है ?
कुछ तो मजबूरी का मारा होगा ,
वरना क्यों बेवफा लगता है ?।। ७ ।।

है खुद से ही परेशान सजन वो ,
और बदला तुमसे लेता है  ।
जब हार जाता है इंसा दुनिया से ,
विक्षिप्त अपनों को करता है ।।८।।

पर में अपनापन करके ही ,
हम संतुष्ट हो लेते हैं ।
अपन, अपने को करके विस्मृत ,
हम अपने को छलते हैं ।।

  -  कुमार अनेकांत
२४/०७/२०१९