Tuesday, February 18, 2020

विश्व शांति का प्रयास

विश्व शांति

ग़ज़ब का 
दौर है 
हम
शांति की
बात करते हैं 
बंदूक की 
नोंक पर 
अमन चैन की 
बात करते हैं 
करके मौत का 
इंतजाम सारा
हम सबकी 
सलामती की 
दुआ करते हैं 

कुमार अनेकांत
19/02/2020

विवाह की समस्या

समस्या हर
युग में रही है
पहले 
विवाह जल्दी 
हो जाता था 
और जवान 
देर से होते थे 
अब 
जवान 
जल्दी हो जाते हैं 
विवाह 
देर से होता है 

कुमार अनेकांत 
१०/०२/२०२०

Sunday, February 16, 2020

वायरस वही करो - ना

नाम अनेक पर वायरस वही
करो - ना 
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कर्तृत्व का 
वायरस 
अनादि से 
जीव को 
मार रहा है 
खुद को 
कर्ता मानने 
की भूल 
सुधार कर 
हम इस 
वायरस से 
बच सकते हैं 
करो-ना वायरस
से बचने का 
उपाय - 
' कुछ मत करो' है
जीव हिंसा  करो-ना
असत्य करो- ना 
चोरी करो- ना 
कुशील करो - ना
परिग्रह करो - ना 
मिथ्यात्व करो- ना 
मांसाहार करो- ना 
रात्रि भोजन करो- ना 
क्रोध करो- ना 
मान करो- ना 
छल करो- ना 
मोह करो- ना 
और
अपनों से 
विश्वास घात करो- ना 
जिस थाली में
खाते हो उसमें 
छेद करो - ना 
राष्ट्र द्रोह करो- ना 

- कुमार अनेकांत, नई दिल्ली
drakjain2016@gmail.com
१६/०२/२०२०

वो मुझसे प्यार नहीं करती ?

वो मुझसे प्यार नहीं करती ?

रोज सुबह पांच बजे उठती है
बच्चों का टिफिन बनाती है
और मेरे लिए चाय 
अखबार छुपा देती है 
ताकि मैं जल्दी नहाकर
मंदिर हो आऊं 
जबरजस्ती मॉर्निंग वॉक पर 
ले जाती है
मेरा मनपसंद खाना भी नहीं देती है 
वैसा खाना देती है जिससे 
वजन न बढ़े और मैं स्वस्थ्य रहूं 
मुझे क्या पहनना है 
किस रंग का पहनना है
अधिकार पूर्वक तय करती है 
विश्वविद्यालय जाते समय 
पर्स, मोबाइल,पेन,रुमाल
बैग हाथ में दे देती है 
वहाँ पहुंचते ही फ़ोन करती है 
अच्छे से पहुंच गए न 
लंच के बाद पूछती है 
दवा ले ली न
इस बीच कपड़े धो देती है 
बाजार से सामान ले आती है 
बच्चों को स्कूल से लाती है 
शाम को फोन करती है 
कब तक पहुंचोगे 
शाम के खाने को देर मत करना
घर आते ही पूछती है दिन कैसा रहा ?
मेरी उलझने सुनती है 
सुलझाने की कोशिश करती है
कुछ नया लिखने को प्रेरित करती है 
कोई महंगी चीज ख़रीदकर दो 
तो डांटती है क्या जरूरत थी इतने खर्चे की
उसे डांस नहीं आता पर  
दिन भर नाचती है....सबकी सेवा में.... 
फोन करती है.....मगर मां बापू को, उनकी खैर पूछने,
सिर्फ अपना ध्यान नहीं रखती 
पूछो तो हँसकर कहती है 
आप ठीक तो मैं ठीक 
खुद के लिए नहीं जीती 
लेकिन मुझे कभी 
एक बार भी आई लव यू नहीं बोलती 
मगर कोई कह सकता है ?
वो मुझसे प्यार नहीं करती ?

जो खुद गुलाब है 
उसे क्या गुलाब दूं ?
जिसका हर दिन वेलेंटाइन है 
उसपर जान कुर्बान दूं ।

- कुमार अनेकान्त १४/०२/२०१८

Tuesday, January 14, 2020

मेरी संक्रांति दूर करो

मेरी भावनाओं की एक 
पतंग 
तुम्हारे दिल की 
छत पर 
कब से अटकी पड़ी है 
उसकी छुड़ैय्या
दे दो
मेरी भी संक्रांति 
मना दो 

- कुमार अनेकांत 
१४/०१/२०२०
मकर संक्रांति

Thursday, January 2, 2020

हमारा हमसे ही अन्याय

हमारा हमसे ही अन्याय 

हम 
अक्सर 
अप्रमाणिक व्यक्ति की 
उस बात को 
जल्दी 
प्रमाण मान लेते हैं 
जो वह 
हमें 
हमारे ही मित्र के
खिलाफ भड़काने 
के लिए 
कहता है ।

 ©कुमार अनेकांत
३/१/२०२०

Tuesday, October 22, 2019

यहां हर शख्स पत्रकार है

फेसबुक वॉट्सएप 
यूट्यूब का दरबार है 
न सलीका‌ न शऊर
हर शख्स पत्रकार है 

सेठ जी हैं संपादक संपादकीय पढ़ पाते नहीं  
क्या छपा है उनके नाम से 
विचार कर पाते नहीं 

प्रवचन जिनके छपते 
वे संत कभी लिखते नहीं 
आत्मकथा उनकी भी छपी
जो पत्र लिख सकते नहीं 

कौन कर रहा यह सेवा 
क्या पता कर सकते नहीं 
नमन उन अनजाने लेखकों को
जो नाम पा सके ही नहीं

कुमार अनेकांत