Tuesday, July 23, 2019

चाहो तो ......

चाहो तो ......

चाहो तो
बह भी सकते हो
चाहो तो तैर भी
सकते हो
वक्त एक
नदी की धार
जैसा है
हमारे पूर्व कर्मों के
फलों की
कतार जैसा है

बहोगे तो वही होगा
जो तकदीर में होगा
तैरोगे तो तकदीर
लिख भी सकते हो

भुजाओं में हो ताकत
तो लड़ भी सकते हो
धारा से बगावत
कर भी सकते हो

बहाव तेज हो तो
बहाता है
अच्छे अच्छों को
मगर लड़ता है मनुज
यह मानकर कि
तुम धारा मोड़ सकते हो

चाहो तो भरोसे
बहाव के
खुद को छोड़ सकते हो
और चाहो तो
खुद ये बंधन
तोड़ सकते हो

     - कुमार अनेकांत©
२३/०७/२०१९

Saturday, July 13, 2019

संसार

संसार
कभी नीचे से आकाश
देखो तो कितना बड़ा
नजर आता है !

किसी ऊंची जगह से
नीचे देखो तो सबकुछ
कितना छोटा
नजर आता है !
यह मनुष्य भव
कितना सा ?
ज्यादा से ज्यादा
९०- १०० वर्ष ?

अगणित वर्ष की आयु
देव और नरक गति
में बिताने के बाद भी
हम इन ७०/८० या
१०० वर्षों को कितना
ज्यादा महत्त्व देते हैं ?
इन्हीं वर्षों में खूब
राग द्वेष और बदला ,
इसने मेरा ये ले लिया
इसने मुझे ये नहीं दिया
मुझे ये बनना है
वो बनना है
इसको हराना है
उसको पाना है
इतना कमाना है
यहां घूमना है
वहां घूमना है
तृप्त ही नहीं होती
आशाएं
जो आकाश से भी
बड़ी हैं
ऊपर से देखो तो
सब कुछ बौना
नजर आता है
जमीं पर रहकर देखो
बस संसार
नज़र आता है
इसी भव में ही
सार नज़र आता है
- कुमार अनेकांत ©
८/७/२०१९

Wednesday, July 10, 2019

गुरु जी

*EVER G - GURU G*  

2G आया गया
3G आया गया
4G आया जाएगा
5G आएगा जाएगा
पर
गुरु G हमेशा थे
हमेशा रहेंगे
इसलिए
गुरू P अर्थात्
पूर्णिमा पर
उन सभी गुरू जी
को नमन
जिन्होंने हम
पत्थरों को
तराशा
गढ़ा
आकार दिया
और कर्तृत्व का
ज़रा सा भी
भार नहीं लिया
- कुमार अनेकांत©

*EVER G - GURU G*

Monday, July 1, 2019

परिवार वाद

परिवार वाद

सभी जगह
परिवारवाद
किसी का खुद का परिवार ही परिवार
किसी का संघ
परिवार ही परिवार  किन्हीं की जाति ही उनका परिवार
किसी के लिए उनका धर्म और साधर्मी ही परिवार किसी के लिए उनकी खुद की समाज ही परिवार 

पर ऐसे शायद ही मिलें जिनके लिए पूरा देश परिवार
सबसे बड़ी विशाल दृष्टि में वसुधा ही कुटुंब यानि परिवार

इसलिए
परिवार वाद  नहीं
परिवार का
सीमाकरण अखरता है

Friday, June 28, 2019

अव्यक्त

अव्यक्त

- कुमार अनेकांत©
   (२७/०६/२००६)

सबके बीच
बहुत कुछ कहा तुमने
बहुत कुछ कहा मैंने
सबने सुना
सबने समझा
पर जो
कहने के पीछे
अनकहा था
वो ही समझा तुमने
वो ही समझा मैंने
बातों के पीछे से
कितनी बातें की
तुमने मैंने
वो न सुनी किसी ने
न समझी किसी ने
कहीं यही संवाद
अध्यात्म तो नहीं
तुम्हारा मेरा
अव्यक्त
वीतराग तो नहीं !

(युवा दृष्टि में  प्रकाशित )

Thursday, June 20, 2019

भक्तिकाल की वापसी

(२१/०६/२०१९ ,१२: १५ am)

भक्ति काल की वापसी

- कुमार अनेकांत ©

देखो
अब प्रश्न
मत करना
मत पूछना
कोई सवाल
मत मांगना
कोई जवाब
कोई समीक्षा
या आलोचना
या फिर व्यंग्य
कुछ भी मत करना
और शक तो
कतई मत करना
यदि
करना
तो सिर्फ मेरी भक्ति
और विद्यमान
या अविद्यमान
गुणों का गान
तभी सुरक्षित
रहेगी जान
क्यों कि अब
न रीति है
न नीति है
न है प्रश्नकाल
वापस आ रहा है
विशिष्ट
भक्ति काल

Tuesday, June 11, 2019

ट्विंकल बेटी

ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार
बेटी आज हम सब शर्मसार
रक्षा तुम्हारी कर न सके हम
आज गई है मानवता हार

अब तुम खेल नहीं सकती
खुल कर चहक नहीं सकती
यही विकास किया है हमने
तुम खुलकर जी नहीं सकती

हम सभी सजा के हैं हकदार

ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार
बेटी आज हम सब शर्मसार
रक्षा तुम्हारी कर न सके हम
आज गई है मानवता हार