Tuesday, January 14, 2020
मेरी संक्रांति दूर करो
Thursday, January 2, 2020
हमारा हमसे ही अन्याय
Tuesday, October 22, 2019
यहां हर शख्स पत्रकार है
Monday, September 9, 2019
चिंता मत करो ISRO
चिंता मत करो ISRO
संपर्क
..............
मेरे दिल का
चंद्रयान
भी मेरे चांद
पर गिर गया था
और मेरा मुझसे ही
संपर्क टूट गया था
वो मजबूत था
इसलिए टूट कर बिखरा नहीं
और इसीलिए
मुझे तो आज वर्षों बाद
भी संपर्क की
पूरी उम्मीद है
तुम मुझ तक
कभी नहीं पहुंचे
पर
मैं तुम तक जरूर
पहुंचूंगा
- कुमार अनेकांत
Friday, August 16, 2019
Tuesday, July 23, 2019
अपनाष्टक
न खुशियों की कोई बात है ।
अवसाद भरी इस महफिल में ,
अब हर कोई नाराज़ है ।।१।।
रोज बहाने मिलने के ।
मन कच्चा हो तो हम ढूढें,
रोज बहानें लड़ने के ।।२।।
तिल का ताड़ बनाते हम ।
व्यर्थ सभी अध्यात्म है दिखता,
यदि साथ नहीं रह पाते हम ।।३।।
औरों को गले लगाते हैं ।
उनसे मिलते मुस्काते हैं ,
बस अपनों में छल दिखलाते हैं ।।४।।
गैर सहयोगी दिखते हैं ।
अपने ठगे जाते हैं अब तो ,
गैर ही मजे उड़ाते हैं ।।५।।
कैसे भी उनसे बोलो तुम ।
संवादों को जारी रखो,
उसकी भूलों को भूलो तुम ।।६।।
अचानक क्यों बेरुखा
दिखता है ?
कुछ तो मजबूरी का मारा होगा ,
वरना क्यों बेवफा लगता है ?।। ७ ।।
और बदला तुमसे लेता है ।
जब हार जाता है इंसा दुनिया से ,
विक्षिप्त अपनों को करता है ।।८।।
हम संतुष्ट हो लेते हैं ।
अपन, अपने को करके विस्मृत ,
हम अपने को छलते हैं ।।
२४/०७/२०१९
चाहो तो ......
चाहो तो ......
चाहो तो
बह भी सकते हो
चाहो तो तैर भी
सकते हो
वक्त एक
नदी की धार
जैसा है
हमारे पूर्व कर्मों के
फलों की
कतार जैसा है
बहोगे तो वही होगा
जो तकदीर में होगा
तैरोगे तो तकदीर
लिख भी सकते हो
भुजाओं में हो ताकत
तो लड़ भी सकते हो
धारा से बगावत
कर भी सकते हो
बहाव तेज हो तो
बहाता है
अच्छे अच्छों को
मगर लड़ता है मनुज
यह मानकर कि
तुम धारा मोड़ सकते हो
चाहो तो भरोसे
बहाव के
खुद को छोड़ सकते हो
और चाहो तो
खुद ये बंधन
तोड़ सकते हो
- कुमार अनेकांत©
२३/०७/२०१९