Wednesday, March 9, 2022

अब की होली किससे मिलो ?

*अब की होली किससे मिलो ?*

उनसे बहुत काम है ,
इसलिए बना के चलो ।

कल को कोई काम पड़े ,
इसलिए निभा के चलो ।

वे कोई काम न बिगाड़ें ,
इसलिए मिल के चलो ।

वे कहीं नाराज़ न हों , 
इसलिए झुक के चलो ।

ये क्या बिगाड़ लेंगे मेरा ?
इनसे क्यों मिल के चलो ?

ये क्या बना देंगे मेरा ?
क्यों बे वजह इनसे
मिलो ?

ये तो सच्चे सीधे हैं ,
मैसेज से ही मान 
जाएंगे ।
होली दीवाली उपहार लेकर ,
क्यों 
इनसे मिलो ? 

उनसे मिलते हैं हर साल ,
उन्हें खुश करने के लिए ।

मगर
अबकी होली 
खुश 
होने के लिए,
एक बार 
हम से मिलो ।।

कुमार अनेकांत ©
१०मार्च २०२०
नई दिल्ली

Tuesday, March 8, 2022

पवित्र भाव

पवित्रभाव हैं सो लेखनी देती कछु लिखाय ,
अर्थ निकालें लोग सब जिसकी जितनी कसाय ।
जिसकी जितनी कसाय कि कछु भावना न समझें ,
है पंचम काल को दोस,मति कछु एसई समझें ।।

कुमार अनेकान्त
9/3/2021

Thursday, February 24, 2022

बेवफा

वो मुझे अक्सर 
सताता बहुत है 
है मुझ पर ज्यादा मेहरबा
हर वक्त 
जताता बहुत है 
गर मजबूरी में लेना ही पड़ जाये 
उससे थोड़ी सी मदद 
महफ़िल में बेवफा 
बताता बहुत है |
            -कुमार अनेकांत
२५/०२/२०१५

Sunday, January 2, 2022

हमारा हमसे ही अन्याय

हमारा हमसे ही अन्याय 

हम 
अक्सर 
अप्रमाणिक व्यक्ति की 
उस बात को 
जल्दी 
प्रमाण मान लेते हैं 
जो वह 
हमें 
हमारे ही मित्र के
खिलाफ भड़काने 
के लिए 
कहता है ।

कुमार अनेकांत 
३/१/२०२०

Saturday, November 6, 2021

कैसा मुमुक्षु ?कैसा अनेकांत ?

कैसा मुमुक्षु ?कैसा अनेकांत ?

जब तक मुझे है आग्रह 
कषाय जनित भाव का 
गुरु का पंथ का 
और ग्रन्थ का 
तब तक दूर है वो तत्व
जिसका दर्शन है सम्यक्त्व 
एकांत में सिमटा मेरा भाव
बिन अनेकांत 
मिटे कैसे मिथ्या प्रभाव 
                  -कुमार अनेकांत

Monday, October 25, 2021

भूकंप के झटके

पुण्य भाव से हट के
पाप कार्य से सट के
कर्ता भाव में अटके 
संसार में हम भटके 
पर भावों को ही रट के
खुद से ही रहते कट के 
प्रकृति को हम क्यों खटके 
आ गये भूकंप के झटके 
                           -कुमार अनेकान्त

Monday, October 11, 2021

जन्नत न् मिली

न शहीदों में नाम आया न दीवानों में 
हम लुट भी गए शहादत न मिली
जीते रहे उनके नाम पर यूँ ही 
 मर भी गए और जन्नत न मिली 

कुमार अनेकान्त