Friday, June 28, 2019

अव्यक्त

अव्यक्त

- कुमार अनेकांत©
   (२७/०६/२००६)

सबके बीच
बहुत कुछ कहा तुमने
बहुत कुछ कहा मैंने
सबने सुना
सबने समझा
पर जो
कहने के पीछे
अनकहा था
वो ही समझा तुमने
वो ही समझा मैंने
बातों के पीछे से
कितनी बातें की
तुमने मैंने
वो न सुनी किसी ने
न समझी किसी ने
कहीं यही संवाद
अध्यात्म तो नहीं
तुम्हारा मेरा
अव्यक्त
वीतराग तो नहीं !

(युवा दृष्टि में  प्रकाशित )

Thursday, June 20, 2019

भक्तिकाल की वापसी

(२१/०६/२०१९ ,१२: १५ am)

भक्ति काल की वापसी

- कुमार अनेकांत ©

देखो
अब प्रश्न
मत करना
मत पूछना
कोई सवाल
मत मांगना
कोई जवाब
कोई समीक्षा
या आलोचना
या फिर व्यंग्य
कुछ भी मत करना
और शक तो
कतई मत करना
यदि
करना
तो सिर्फ मेरी भक्ति
और विद्यमान
या अविद्यमान
गुणों का गान
तभी सुरक्षित
रहेगी जान
क्यों कि अब
न रीति है
न नीति है
न है प्रश्नकाल
वापस आ रहा है
विशिष्ट
भक्ति काल

Tuesday, June 11, 2019

ट्विंकल बेटी

ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार
बेटी आज हम सब शर्मसार
रक्षा तुम्हारी कर न सके हम
आज गई है मानवता हार

अब तुम खेल नहीं सकती
खुल कर चहक नहीं सकती
यही विकास किया है हमने
तुम खुलकर जी नहीं सकती

हम सभी सजा के हैं हकदार

ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार
बेटी आज हम सब शर्मसार
रक्षा तुम्हारी कर न सके हम
आज गई है मानवता हार

Wednesday, March 20, 2019

होली के रंग देश के संग

होली के रंग देश के संग

        -  कुमार अनेकांत

इस बार
जिन्हें जीतना है उन्हें भी पता है
जिन्हें हारना है उन्हें भी पता है
तो ऐसा कीजिए
लोकतंत्र में नया
अध्याय लगवाइए
होली पर देशभक्ति के
रंग में रंग जाइए
बाद में गठबंधन और समर्थन
करने की बजाय
पहले ही निर्णय करवाइए
बिना चुनाव ही
सरकार बनवाइए

आपका और देश का
समय और पैसा
दोनों बच जाएगा
तुम पांच साल और चला लो
फिर हमारा नंबर आ जाएगा

Wednesday, October 3, 2018

क्षमा करेंगे तो मिलेगी

क्षमा करेंगे तो मिलेगी

- कुमार अनेकान्त

हम दूसरों को वही दे सकते हैं
जो हमारे पास है .....
क्रोध,घृणा,ईर्ष्या,क्रूरता   
                   या         
क्षमा, करुणा,दया ,प्रेम
  और
जो दे सकते है
वही वापस लेने का भी
अधिकार रखते हैं
इसलिए
गेंद दीवार पर हम
उतने ही वेग से फेंकें
जितने वेग से हम
वापस उसे झेल सकें

क्षमा करेंगे तो मिलेगी

Monday, September 10, 2018

हमें जमाने के दस्तूर में जीना नहीं आया




हमें जमाने के दस्तूर में जीना नहीं आया

- कुमार अनेकान्त

कभी झूठी बातें बनाना नहीं आया
जब काम पड़े तब पटाना नहीं आया
हम हक़ीक़त के ही कायल रहे हरदम
स्वार्थ में लोगों को फंसाना नहीं आया

वो फ़रेब के इतिहास बनाता ही चला गया
हम ठगे गए ,हमें ये भी बताना नहीं आया
जिनका पता है दोहरा चरित्र साफ साफ
मुख पर उनकी तारीफ़ करना नहीं आया

अपमान का एक घूंट भी पीना नहीं आया
गलत देख चुपचाप ही सहना नहीं आया
दिखा देते हैं उसे नाराजगी नाराज हैं जिससे
रूठकर भी मुस्कुराकर मिलना नहीं आया

अध्यात्म की दुनिया में भी चलता है दिखावा
देखा बहुत अभी तक समझ में नहीं आया
नसीहतें हैं कि चलो तुम भी उनके उसूलों पर
हमें जमाने के दस्तूर में जीना नहीं आया

Thursday, July 19, 2018

प्रस्ताव और अविश्वास

याद है
एक बार
दिल की संसद में
मेरे प्रस्ताव पर
तुमने भी अविश्वास
जताया था
पर
सरकार तुम्हारी गिर गयी थी
तभी से आज
हम अपनी
स्वतः सिद्ध सत्ता
के स्थायी प्रधानमंत्री हैं
और तुम सिर्फ बेसहारा मतदाता
तुम्हारे अविश्वास का
धन्यवाद
-Kumar Anekant