Monday, September 26, 2022

बांध

किस्मत ने लिखे हैं कैसे कैसे रूप  ,
तदबीरें भी जिसकी गुलाम हो गईं ।
जाने कैसे रोका है उसने सैलाब को, 
आंखें भी आसुओं का बांध हो गईं ।।

कुमार अनेकान्त ©

Saturday, September 10, 2022

औपचारिक क्षमावाणी

*औपचारिक क्षमावाणी* 

         ✍️- कुमार अनेकान्त
               11/09/2022

वे हमपर ज़ुल्म तक करते रहे 
और हमने उफ़ तक न किया 
हमने बस आह भरी
तो वे बुरा मान गए 

उनका पढ़कर क्षमा संदेश 
व्हाट्सप्प पर 
हम भावुकता में फिर उनके 
दीवाने हो गए 

हम भी मांगे मुआफी 
ये मुद्द'आ था उनका 
हमने 'क्षमा किया' लिख दिया
तो नाराज हो गए

Friday, August 26, 2022

सम्यक्त्व की शक्ति

*एगं सम्मत्तं  घेतव्वं*

ण भावइ मोक्खपयं,
सो वि लहइ य मोक्खं सद्दिट्ठी ।
सो सम्मत्तस्स सत्ति
एगं सम्मत्तं  घेतव्वं ।।

सम्यक्त्व की इतनी शक्ति है कि 
सम्यग्दृष्टि मोक्ष पद न चाहे तो भी उसे वह जबरजस्ती मिलता है इसलिए एक मात्र सम्यकदर्शन को ग्रहण करना चाहिए । 

पर्युषण-
दसलक्षण पर्व की शुभकामनाओं के साथ 

प्रो अनेकान्त कुमार जैन ,नई दिल्ली 
27/08/2022

Tuesday, August 9, 2022

स्वतंत्रता का अमृतमहोत्सव

अमियमहोस्सवे जण मणगणसगतंतस्स अइउमंगो।
सुसोहिओ णवभरहे,गेहे गेहे णव तिरंगो ।।

आज
स्वतंत्रता के अमृतमहोत्सव पर नए भारत के जन मन गण में अति उमंग है और यहां के घर घर में तिरंगा सुशोभित हो रहा है ।

- कुमार अनेकान्त 

Monday, May 16, 2022

खुदाई का हर पत्थर बोलेगा

*खुदाई का हर पत्थर बोलेगा*

दबा ले कोई कितना भी 
एक रोज़ उभर के निकलेगा 
शासन था जिनेन्द्र का 
खुदाई का हर पत्थर बोलेगा 

तीर्थ जो हैं संभलते नहीं 
नए को कौन संभालेगा ?
जैन हैं मुट्ठीभर बिखरे से 
हड़पे को कौन निकालेगा ?

उलझे पंथों के झगड़े में 
अस्तित्व कौन बचाएगा ?
कुल्हाड़ी अपने ही पैरों पर 
गर मारे तो कहाँ जायेगा ? 

चेतन हो गए गर जड़ ,
तो मोक्ष कौन जाएगा ?
निठल्ले हों गर पूत 
तो धर्म कौन बचाएगा ? 

©कुमार अनेकान्त

Sunday, May 1, 2022

कृष्णलाल जागीण की रचना

मित्रवर कृष्ण लाल जागीण ने यह पढ़कर साहित्यकारों के whatsaap ग्रुप अथाई में निम्नलिखित पंक्तियां लिखकर भेजी हैं 

श्रद्धेय कुमार शिरोधार्य आदेश।
समरस जीवन का पावन सन्देश।
अनुकूल प्रतिकूल में बोध विशेष।
जीवनसिन्धु मन्थन कुछ ना शेष।
मर्मज्ञ कवि डॉ.कुमार अनेकान्त।
चंचल मन की उलझनें हुई शान्त।
कुशल हैं उत्तम काव्य रचनाकार।
मार्मिकता सूक्ष्म शब्द के संस्कार।
रखते हो पावन हृदय के पूरे उद्गार।
अनेक से एक श्रेष्ठ भुवन सुविचार।
नेक दिल कमल साहित्य सरोवर।
कान्ति शाश्वत आनन पर कविवर।
न्यास नवीन अनुकरणीय आदर्श।
तत्व बोधक हम करें चरणस्पर्श।।

Saturday, April 16, 2022

बुरा मत कह मेरे बारे में

बुरा मत कह मेरे बारे में, इतना तो सोच । 
दोस्त तेरे, महफ़िल मेरी भी सजाते हैं।। 
- कुमार अनेकांत©
17/04/2015