प्रवचन सभी के लिए नहीं
धम्मबोहो सव्वेसु , तच्चणाणं उसुय-विणयजुत्ते य।
पवयणं ण सव्वाणं , रयणं खलु वोढुं ण सक्कंति ॥
भावार्थ :
धर्म का सामान्य ज्ञान सभी को देना चाहिए
लेकिन तत्त्वज्ञान युक्त प्रवचन सिर्फ उसी को देना चाहिए जो विनम्रता से निवेदन करे ,उत्सुक हो ,जिज्ञासु हो
क्योंकि हीरे जैसे रत्नों का मूल्य सभी वहन नहीं कर पाते हैं ।
अभिप्राय :
तत्त्वज्ञान के लिए वे ही जीव पात्र होते हैं जिनमें रत्नत्रय की योग्यता हो ।
अनेकांत
५/९/२६
शिक्षक दिवस
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