Thursday, December 10, 2020

समकालीन प्राकृत कविता 21 आत्म-सुख

*जह पहियो खलु पावइ,गिम्हम्मि छायासुहो तउवरम्मि ।*

*तह णाणी अप्पसुहं, सुयम्मि य दुक्खसंसारम्मि ।।*

जिस प्रकार ग्रीष्म ऋतु में गर्मी से परेशान पथिक पेड़ के नीचे अवश्य ही छाया सुख का अनुभव करता है उसी प्रकार ज्ञानी इस दुखमय संसार में रहकर भी श्रुत ( शास्त्र ) आराधना में आत्म सुख का अनुभव करता है ।

कुमार अनेकान्त
11/12/2020

Friday, November 13, 2020

महावीर-णिव्वाण-दीवोसवो

महावीर-णिव्वाण-दीवोसवो

 

जआ अवचउकालस्स सेसतिणिवस्ससद्धअट्ठमासा ।

  तआ होहि अंतिमा य महावीरस्स खलु देसणा ।।१।।

जब अवसर्पिणी के चतुर्थ काल के तीन वर्ष साढ़े आठ मास शेष थे तब भगवान् महावीर की अंतिम देशना हुई थी ।

 

कत्तियकिण्हतेरसे जोगणिरोहेण ते ठिदो झाणे ।

   वीरो अत्थि य झाणे अओ पसिद्धझाणतेरसो ।।२।।

योग निरोध करने के बाद कार्तिक कृष्णा त्रियोदशी को वे (भगवान् महावीर)ध्यान में स्थित हो गए ।और (आज) ‘वीर प्रभु ध्यान में हैं’ अतः यह दिन ध्यान तेरस के नाम से प्रसिद्ध है ।

 

 चउदसरत्तिसादीए पच्चूसकाले पावाणयरीए 

        ते  गमिय परिणिव्वुओ देविहिं  अच्चीअ मावसे ।।३।।

चतुर्दशी की रात्रि में स्वाति नक्षत्र रहते प्रत्यूषकाल में वे (भगवान् महावीर) परिनिर्वाण को प्राप्त हुए और अमावस्या को देवों के द्वारा पूजा हुई 

 

गोयमगणहरलद्धं अमावसरत्तिए य केवलणाणं 

  णाणलक्खीपूया य दीवोसवपव्वं जणवएण ।।४।।

इसी अमावस्या की रात्रि को गौतम गणधर ने केवल ज्ञान प्राप्त किया ।लोगों ने केवल ज्ञान रुपी लक्ष्मी की पूजा की और दीपोत्सवपर्व  मनाया ।

 

     कत्तिसुल्लपडिवदाए देविहिं गोयमस्स कया पूया 

णूयणवरसारंभो वीरणिव्वाणसंवच्छरो  ।।५।।

अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को देवों ने भगवान् गौतम की पूजा की और इसी दिन से वीर निर्वाण संवत और नए वर्ष का प्रारंभ हुआ ।

शाकाहार हाईकू पंचक

 शाकाहार हाईकू पंचक*


कुमार अनेकान्त,
नई दिल्ली
drakjain2016@gmail.com 
11/11/2020

1.
जीवन सार 
हमारा शाकाहार
न मांसाहार

2.
खाकर मांस 
पेट को कब्रिस्तान 
मत बनाओ

3.
रखो करुणा
आहार शाकाहार
जीवों की दया 

4.
मानव धर्म
जीवन शाकाहार 
सात्विक कर्म 

5.
अपनाएगा 
हिन्दु मुसलमान
सच्चा ईमान

Friday, September 25, 2020

हम फर्जी हैं अनुयायी

*हम फ़र्जी हैं अनुयायी*

कुमार अनेकान्त 
26/09/2020

गुरुदेव तो बहुत भाये हमें ,
पर उनकी सीख नहीं भायी ।
उनके पथ को न अपनाते,
हम फ़र्जी हैं अनुयायी ।।1।।

उन्होंने समरसता का किया शंखनाद ,
पर हमको वैषम्य पड़ा दिखलाई ।
उन्होंने बोले सदा मीठे बोल ,
पर हमको कड़वाहट ही भायी ।।2।।


वे शास्त्र बिन कुछ न बोले ,
पर हम बिन शास्त्र ही बोले ।
वे करते थे गैरों का भी सम्मान,
हम अपनों का करते अपमान ।।3।।

उन जैसा जीवन जीने की,
एक डोर भी न पकड़ पाई ।
उनके पथ को न अपनाते,
हम फ़र्जी हैं अनुयायी ।।4।।

वे खुद की मूर्ति के खिलाफ ,
हमने उन्हीं की मूर्ति 
बनवाई ।
वे वीतराग के प्रतिमूर्ति ,
हमने कषायों की कसमें खाई ।।5।।

वे दुनिया को समझाते रहे सदा ,
नहीं समझे खुद के ही
अनुयायी ।
उनके पथ को न अपनाते,
हम फ़र्जी हैं अनुयायी ।।6।।

Wednesday, September 23, 2020

लव षष्टक

लव षष्टक
             -कुमार अनेकांत 
वो दीवानी बावरी 
करके सोला श्रृंगार 
हम में ऐसी क्या कमी दिखी ?
जो हुई लव जेहादी शिकार 

उस कोमल कली को 
गर इधर ही मिले दुलार 
क्यों वो भटके प्यार को 
हो लव जेहादी शिकार 

हमने भी इतने कस दिए 
सामाजिक प्रतिबन्ध 
जाति पाती के नाम पर 
सिमित हुए सम्बन्ध 

क्या बनिया क्या ब्राह्मण 
क्या क्षत्रिय क्या जाट
बेटी अपनों में ही रहे 
अब तय कर लो यह बात 

चलो जपना शुरू करें 
हम भी नेह के मंत्र 
ताकि सफल न हो सके 
लव जेहादी षडयंत्र

जागें खोलें हम भी अपने 
खिड़की और किवार
आने दो अब घर आँगन में 
अपनेपन की बयार

Monday, September 14, 2020

हमारा भाषा परिवार

*हमारा भाषा परिवार*


*हिंदी माआ अत्थि य,*
*पिउ सक्कयं पाइयं सअलदाइ।*

 *णाणी अवभंसो खलु, एसा य भारदभासा परिवारो ।।* 

हिंदी माता है,संस्कृत पिता और प्राकृत सबकी  दादी है और अपभ्रंश हमारी नानी है । यह ही भारत भाषा परिवार है ।

कुमार अनेकान्त 
14/09/2020

Sunday, September 6, 2020

कभी सपना नहीं आया तो कभी देखना नही आया

कहीं नक्शे के मुताबिक जमीं न मिली ,
कहीं मिली तो नक्शा बनाना नहीं आया ।
बैठा ही ना सके अरमानों को 
हैसियत के ढांचे में,
कभी सपना नहीं आया तो कभी देखना नही आया ।।
(कुमार अनेकान्त 6/09/2020)