Tuesday, September 30, 2025

अनेकान्त स्पंदन

अनेकान्त स्पंदन 
                
              - कुमार अनेकान्त 


यदि किसी के भी प्रति है नफ़रत और बैर।
तो मंदिर-मस्जिद जाना केवल एक सैर।।

यदि बैर-वायरस से खुद को रखना महफ़ूज़।
क्षमा-एंटीवायरस इंस्टॉल करें, रहें सदा महफ़ूज़।।

जब तक दिल में खोट है, मन में बसता पाप।
व्यर्थ सभी सिद्धि-मंत्र हैं, व्यर्थ सभी हैं जाप।।

यदि क्रोध, मान, माया, लोभ जीवन में हों शेष।
व्यर्थ चले जाते सभी पूजन, पाठ, अभिषेक।।

यदि करुणा और दया का न जीवन में विस्तार।
क्रियाकाण्ड सब व्यर्थ हैं, नहीं निकलता सार।।

आत्मज्ञान ही ज्ञान है, शेष सभी अज्ञान।
गर्दभ ढोते शास्त्र बहु, होता नहीं भान।।

कैसे पाए आत्म का सच्चा दिव्य प्रमाण।
परपीड़ा की अनुभूति जो कर न सके इंसान।।

बाहर की दुनिया में हम इतने मस्त हैं ।
खुद से मिलने की सभी लाइनें व्यस्त हैं ।।

त्याग धर्म शुद्ध भाव है ,दान हमारा शुभभाव ।
पहला निज उपकार है दूजा पर उपकार ।।

कर्मों की दुनिया में भ्रष्टाचार नहीं चलता । 
करे कोई भरे कोई यह अनाचार नहीं चलता ।।

अंदर बाहर एक हो नर वो ही है महान् ।
तारे भव समुद्र से आर्जव धर्म महान् ।।

जीने वाले ही झुकना जानते हैं ,
ये हुनर मुर्दे में कहाँ मानते हैं । 
हो नर तो नम्रता में सम्मान मानो ,
उठते वही हैं जो झुकना जानते हैं ।।

आज दिल के रंजो गम चलो मिलकर साफ कर दें ,
जियेंगे कब तक घुटन में अब सभी को माफ कर दें ।
माँग लें माफी गुनाहों की जो अब तक हमने किये ,
अब नहीं कोई शिकायत दुनिया को यह साफ कर दें ।।

दोष गैरों के देखकर ही उम्र गुजार दी,
इनायत खुद पर भी नजरें हम आज कर दें ।
आईना ही करते रहे साफ हम तमाम उम्र ,
चलो धूल चेहरे की भी अब साफ कर दें ।।

continue ...

Wednesday, August 27, 2025

सराग सम्यग्दर्शन

सराग सम्यग्दर्शन 


मंदकसाओ पसमो असारसंसारभओ संवेगो ।
जीवदया अणुकंपा  , तच्चसद्धा खलु अत्थिक्कं ।।

भावार्थ - 
मंद कषाय भाव 'प्रशम', असार संसार से भय 'संवेग',जीवों के प्रति दया का भाव 'अनुकंपा' और जीवादि तत्त्वों के प्रति विश्वास 'आस्तिक्य' कहलाता है । (इन चार लक्षणों  से युक्त सराग सम्यग्दर्शन होता है ।)

कुमार अनेकान्त 
28/08/25

Friday, August 22, 2025

दुश्मनों तुम ज़रा बाद में हमला करना,

दुश्मनों तुम ज़रा बाद में हमला करना,
हम अभी आपसी लड़ाइयों में मशगूल हैं ।
- कुमार अनेकान्त 23/08/25

गुनाह तब है

कौन कहता है बड़ी लकीरें न खींची जाए ।
गुनाह तब है जब पुरानी को मिटाया जाय ।।

कुमार अनेकान्त
20/08/ 25

Friday, August 1, 2025

बहुत मुश्किल है बच पाना



जहां को जीतकर भी जहाँ भाता है  हारते चला जाना ।
उसके सजदे में सर का खुद ब खुद 
यूं झुकते चला जाना ।।
जान से प्यारे पर ही जान का कुर्बान हो जाना ।
मोहब्बत की इस रिवायत से बहुत मुश्किल है बच पाना । ।

कुमार अनेकान्त 
2/08/25

Sunday, July 20, 2025

लोकप्रिय

लोकप्रिय 

जं सच्चं सव्वदा ण होदि लोयप्पिअं  खलु संसारे ।
जं लोयप्पिअं होदि सव्वदा ण होदि  खलु सच्चं ।।

जो सही है, वो हमेशा लोकप्रिय नहीं होता,और जो लोकप्रिय होता है,वो हमेशा सही नहीं होता!

कुमार अनेकान्त©
21/07/25