Sunday, August 22, 2021

तालिबान होते जा रहे हैं

*अपनों को ही मिटाने में, कुर्बान होते जा रहे हैं ।*
*हम भी कहीं न कहीं, तालिबान होते जा रहे हैं ।।*

*कुमार अनेकान्त©*
23/08/2021

Sunday, August 1, 2021

दोस्ती

दोस्ती

ता उम्र हमने दोस्ती की इबादत की है ,
कमबख्त लोग एक दिन मुकरर कर बैठे |

हम नहीं जानते क्या है मतलब इसका ,
जो जरा मुस्करा के मिला,इकरार कर बैठे || 

उनके वजूद से ही खुद का वजूद माना,
बेरुखी उनकी थी और हम गुनहगार बन बैठे |

अब इस ऐतबार को आप चाहे जो कहें ,
उसने दिन को कहा रात और हम सो बैठे ||


- कुमार अनेकांत
2/08/2018

किताबें कुछ सिखाती हैं मित्र सबकुछ सिखाता है

*किताबें कुछ सिखाती हैं मित्र सबकुछ सिखाता है*

©कुमार अनेकान्त

दुनिया उसूल सिखाती है 
मित्र तोड़ना सिखाता है 
दुनिया जीवन सिखाती है 
मित्र जीना सिखाता है 
किताबें प्रेम पढ़ाती हैं 
मित्र प्रयोग सिखाता है 
किताबें अंग पढ़ाती हैं 
मित्र उपयोग सिखाता है 
किताबें शब्द सिखाती हैं 
मित्र अपशब्द सिखाता है 
दुनिया बहुत डराती है 
मित्र लड़ना सिखाता है 
दुनिया पैसा सिखाती है 
मित्र खर्चा सिखाता है 
जब सब लोग दें धोखा
मित्र विश्वास सिखाता है 
बिगाड़ता है जरूर मित्र अपना 
पर वही जीना सिखाता है 
किताबें कुछ सिखाती हैं
मित्र सबकुछ सिखाता है


मित्रता दिवस की सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं

Monday, July 26, 2021

यथार्थ

यथार्थ 


यहां जिसकी जितनी है जरूरत ,

बस उसकी उतनी है अहमियत ।

शौक हो तो करते रहिए उपकार ,

वर्ना खोजते ही रहेंगे इंसानियत ।।


जिंदगी भर पाले रहते हैं वहम,

कि हम ही हैं सबके लिए अहम ।

लोग नाम भूल जाएंगे आपका ,

गायब होकर देखिए एकदम ।।


आप रहें न रहें फर्क कुछ भी नहीं ,

दिन तेरह भी नहीं टिकती यादें ।

आप कुछ भी कहते सिखाते रहें ,

यहीं रह जाती हैं यहां की बातें  ।।

वक्त रुकता है न जमाना बदलता है ,

संसार अपनी ही चाल से चलता है ।

चाहे कितने भी प्यार से पालो पंक्षी ,

सूखा पेड़ तो ठिकाना बदलता है ।।

कुमार अनेकान्त 

26/07/2021


Saturday, July 17, 2021

अणुवमाहिणंदणं

*अणुवमाहिणंदणं* 

जइण-गणिय-सुदविउसो ,
अणुवमो करणाणुओय-सुविण्णो ।
जिणवाणी-सुपुत्तस्स ,
इह मणुभवो सुसहलो होदु ।।

अनुपमाभिनंदन

जैन गणित के श्रुतधर विद्वान ,करणानुयोग के अनुपम सुविज्ञ ,जिनवाणी के सुपुत्र का यह मनुष्य भव सुसफल होवे । 

डॉ अनेकान्त जैन ,नई दिल्ली

Friday, July 9, 2021

आईना

आईना हो तो अपना भी अक्स नजर आए , 
दूरबीन ही रखते हैं बुराई वाले ।

AKJ
9/7/2021

Tuesday, July 6, 2021

अंदाज़

*वो बदल सा जाता है*

© कुमार अनेकान्त
    (6/07/2021)

खुद को ही देखते देखते,
जवां मौसम ढल सा जाता है ।
अंदाज़ अपने आईने में देखकर ,
गुरूर हुस्न का बढ़ सा जाता है ।।

कीमत नहीं समझते ,
रहता है जो नज़दीक ।
जुदाई में अक्सर उसका ,
एहसान याद आता है ।।

जिसको पालो घर पर,
कितना भी अपना समझकर ।
गैरों की छत पाते ही,
वो बदल सा जाता है ।।