Saturday, November 6, 2021

कैसा मुमुक्षु ?कैसा अनेकांत ?

कैसा मुमुक्षु ?कैसा अनेकांत ?

जब तक मुझे है आग्रह 
कषाय जनित भाव का 
गुरु का पंथ का 
और ग्रन्थ का 
तब तक दूर है वो तत्व
जिसका दर्शन है सम्यक्त्व 
एकांत में सिमटा मेरा भाव
बिन अनेकांत 
मिटे कैसे मिथ्या प्रभाव 
                  -कुमार अनेकांत

Monday, October 25, 2021

भूकंप के झटके

पुण्य भाव से हट के
पाप कार्य से सट के
कर्ता भाव में अटके 
संसार में हम भटके 
पर भावों को ही रट के
खुद से ही रहते कट के 
प्रकृति को हम क्यों खटके 
आ गये भूकंप के झटके 
                           -कुमार अनेकान्त

Monday, October 11, 2021

जन्नत न् मिली

न शहीदों में नाम आया न दीवानों में 
हम लुट भी गए शहादत न मिली
जीते रहे उनके नाम पर यूँ ही 
 मर भी गए और जन्नत न मिली 

कुमार अनेकान्त 

सब कुछ था पर वैराग्य नहीं था

तन था मन था संयममय जीवन था
ज्ञान  प्रवचन और भक्ति भजन था 
करुणा थी लबालब आतम में
जगत सुधरे इसका भरपूर जतन था 

स्वाध्याय तीर्थ उपदेश प्रचुर था 
धर्म फैलाने में भरपूर मगन था 
पर इस भव को सार्थक करने 
सब कुछ था पर वैराग्य नहीं था  

कुमार अनेकान्त
11/10/2021

Wednesday, September 29, 2021

तुम पटाते हो हम पट जाते हैं

तुम ठगते हो 
हम ठग जाते हैं
तुम रुलाते हो 
हम रो लेते हैं
तुम हँसाते हो 
हम हँस लेते हैं 
लाख गुस्ताखियां 
भी माफ़ करके तेरी 
तुम पटाते हो 
हम पट जाते हैं ।

©कुमार अनेकान्त
29/09/2021

Tuesday, September 28, 2021

क्षमा याचना की सीमा

क्षमा याचना की सीमा

*तिव्वकसायजुत्तं य मूढमणुस्सं* *खमा हु ण यायव्वा।*
*वरं अप्पम्मि ठिदूण*
*भावेण सुद्धो भवियव्वो*।।


तीव्रकषाययुक्त  और मूर्ख मनुष्य से  कहकर क्षमा याचना नहीं करनी चाहिए ,इससे तो अच्छा है आत्मस्थ होकर (उन्हें क्षमा कर देना चाहिए और अंदर ही अंदर) भावों विशुद्धि प्राप्त करनी चाहिए ।

डॉ अनेकान्त कुमार जैन 
27/09/2021

Tuesday, August 24, 2021

णमो कुण्डकुण्डस्स

*णमो कुण्डकुण्डस्स*

*जस्स वाणी सुणिदूण* ,
*सेआम्बरो वि हवदि दिअम्बरो।*
*णमो य तिहुवणपुज्जं* 
*दिअम्बरायरियो कुण्डकुण्डस्स।।*

जिनकी दिव्य वाणी को सुनकर  श्वेताम्बर भी (अपना मताग्रह त्यागकर) दिगंबर  हो रहे हैं ,(उन ) तीनों लोकों में पूज्य महान दिगंबर जैन आचार्य कुन्दकुन्द को मेरा नमस्कार है ।

प्रो अनेकान्त कुमार जैन ,नई दिल्ली 
24/08/2021