Wednesday, September 29, 2021

तुम पटाते हो हम पट जाते हैं

तुम ठगते हो 
हम ठग जाते हैं
तुम रुलाते हो 
हम रो लेते हैं
तुम हँसाते हो 
हम हँस लेते हैं 
लाख गुस्ताखियां 
भी माफ़ करके तेरी 
तुम पटाते हो 
हम पट जाते हैं ।

©कुमार अनेकान्त
29/09/2021

Tuesday, September 28, 2021

क्षमा याचना की सीमा

क्षमा याचना की सीमा

*तिव्वकसायजुत्तं य मूढमणुस्सं* *खमा हु ण यायव्वा।*
*वरं अप्पम्मि ठिदूण*
*भावेण सुद्धो भवियव्वो*।।


तीव्रकषाययुक्त  और मूर्ख मनुष्य से  कहकर क्षमा याचना नहीं करनी चाहिए ,इससे तो अच्छा है आत्मस्थ होकर (उन्हें क्षमा कर देना चाहिए और अंदर ही अंदर) भावों विशुद्धि प्राप्त करनी चाहिए ।

डॉ अनेकान्त कुमार जैन 
27/09/2021

Tuesday, August 24, 2021

णमो कुण्डकुण्डस्स

*णमो कुण्डकुण्डस्स*

*जस्स वाणी सुणिदूण* ,
*सेआम्बरो वि हवदि दिअम्बरो।*
*णमो य तिहुवणपुज्जं* 
*दिअम्बरायरियो कुण्डकुण्डस्स।।*

जिनकी दिव्य वाणी को सुनकर  श्वेताम्बर भी (अपना मताग्रह त्यागकर) दिगंबर  हो रहे हैं ,(उन ) तीनों लोकों में पूज्य महान दिगंबर जैन आचार्य कुन्दकुन्द को मेरा नमस्कार है ।

प्रो अनेकान्त कुमार जैन ,नई दिल्ली 
24/08/2021

Sunday, August 22, 2021

तालिबान होते जा रहे हैं

*अपनों को ही मिटाने में, कुर्बान होते जा रहे हैं ।*
*हम भी कहीं न कहीं, तालिबान होते जा रहे हैं ।।*

*कुमार अनेकान्त©*
23/08/2021

Sunday, August 1, 2021

दोस्ती

दोस्ती

ता उम्र हमने दोस्ती की इबादत की है ,
कमबख्त लोग एक दिन मुकरर कर बैठे |

हम नहीं जानते क्या है मतलब इसका ,
जो जरा मुस्करा के मिला,इकरार कर बैठे || 

उनके वजूद से ही खुद का वजूद माना,
बेरुखी उनकी थी और हम गुनहगार बन बैठे |

अब इस ऐतबार को आप चाहे जो कहें ,
उसने दिन को कहा रात और हम सो बैठे ||


- कुमार अनेकांत
2/08/2018

किताबें कुछ सिखाती हैं मित्र सबकुछ सिखाता है

*किताबें कुछ सिखाती हैं मित्र सबकुछ सिखाता है*

©कुमार अनेकान्त

दुनिया उसूल सिखाती है 
मित्र तोड़ना सिखाता है 
दुनिया जीवन सिखाती है 
मित्र जीना सिखाता है 
किताबें प्रेम पढ़ाती हैं 
मित्र प्रयोग सिखाता है 
किताबें अंग पढ़ाती हैं 
मित्र उपयोग सिखाता है 
किताबें शब्द सिखाती हैं 
मित्र अपशब्द सिखाता है 
दुनिया बहुत डराती है 
मित्र लड़ना सिखाता है 
दुनिया पैसा सिखाती है 
मित्र खर्चा सिखाता है 
जब सब लोग दें धोखा
मित्र विश्वास सिखाता है 
बिगाड़ता है जरूर मित्र अपना 
पर वही जीना सिखाता है 
किताबें कुछ सिखाती हैं
मित्र सबकुछ सिखाता है


मित्रता दिवस की सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं

Monday, July 26, 2021

यथार्थ

यथार्थ 


यहां जिसकी जितनी है जरूरत ,

बस उसकी उतनी है अहमियत ।

शौक हो तो करते रहिए उपकार ,

वर्ना खोजते ही रहेंगे इंसानियत ।।


जिंदगी भर पाले रहते हैं वहम,

कि हम ही हैं सबके लिए अहम ।

लोग नाम भूल जाएंगे आपका ,

गायब होकर देखिए एकदम ।।


आप रहें न रहें फर्क कुछ भी नहीं ,

दिन तेरह भी नहीं टिकती यादें ।

आप कुछ भी कहते सिखाते रहें ,

यहीं रह जाती हैं यहां की बातें  ।।

वक्त रुकता है न जमाना बदलता है ,

संसार अपनी ही चाल से चलता है ।

चाहे कितने भी प्यार से पालो पंक्षी ,

सूखा पेड़ तो ठिकाना बदलता है ।।

कुमार अनेकान्त 

26/07/2021