कुमार अनेकान्त की कवितायें
Thursday, February 24, 2022
बेवफा
वो मुझे अक्सर
सताता बहुत है
है मुझ पर ज्यादा मेहरबा
हर वक्त
जताता बहुत है
गर मजबूरी में लेना ही पड़ जाये
उससे थोड़ी सी मदद
महफ़िल में बेवफा
बताता बहुत है |
-कुमार अनेकांत
२५/०२/२०१५
Sunday, January 2, 2022
हमारा हमसे ही अन्याय
हमारा हमसे ही अन्याय
हम
अक्सर
अप्रमाणिक व्यक्ति की
उस बात को
जल्दी
प्रमाण मान लेते हैं
जो वह
हमें
हमारे ही मित्र के
खिलाफ भड़काने
के लिए
कहता है ।
कुमार अनेकांत
३/१/२०२०
Saturday, November 6, 2021
कैसा मुमुक्षु ?कैसा अनेकांत ?
कैसा मुमुक्षु ?कैसा अनेकांत ?
जब तक मुझे है आग्रह
कषाय जनित भाव का
गुरु का पंथ का
और ग्रन्थ का
तब तक दूर है वो तत्व
जिसका दर्शन है सम्यक्त्व
एकांत में सिमटा मेरा भाव
बिन अनेकांत
मिटे कैसे मिथ्या प्रभाव
-कुमार अनेकांत
Monday, October 25, 2021
भूकंप के झटके
पुण्य भाव से हट के
पाप कार्य से सट के
कर्ता भाव में अटके
संसार में हम भटके
पर भावों को ही रट के
खुद से ही रहते कट के
प्रकृति को हम क्यों खटके
आ गये भूकंप के झटके
-कुमार अनेकान्त
Monday, October 11, 2021
जन्नत न् मिली
न शहीदों में नाम आया न दीवानों में
हम लुट भी गए शहादत न मिली
जीते रहे उनके नाम पर यूँ ही
मर भी गए और जन्नत न मिली
कुमार अनेकान्त
सब कुछ था पर वैराग्य नहीं था
तन था मन था संयममय जीवन था
ज्ञान प्रवचन और भक्ति भजन था
करुणा थी लबालब आतम में
जगत सुधरे इसका भरपूर जतन था
स्वाध्याय तीर्थ उपदेश प्रचुर था
धर्म फैलाने में भरपूर मगन था
पर इस भव को सार्थक करने
सब कुछ था पर वैराग्य नहीं था
कुमार अनेकान्त
11/10/2021
Wednesday, September 29, 2021
तुम पटाते हो हम पट जाते हैं
तुम ठगते हो
हम ठग जाते हैं
तुम रुलाते हो
हम रो लेते हैं
तुम हँसाते हो
हम हँस लेते हैं
लाख गुस्ताखियां
भी माफ़ करके तेरी
तुम पटाते हो
हम पट जाते हैं ।
©कुमार अनेकान्त
29/09/2021
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)